टी-20 वर्ल्ड कप में अंपायरों के फिक्सिंग में शामिल होने का दावा करने वाले स्टिंग ऑपरेशन पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। श्रीलंका के अंपायर सागर गलागे पर यह आरोप लगा है कि उन्होंने भारत के हक में फैसले करवाने में मैच रेफरी और अन्य अधिकारियों को 'मैनेज' कर मदद का वादा किया था। अगर कोई अंपायर इस तरह के काम के लिए तैयार हो जाता है तो वह चिंता का सबब है। लेकिन स्टिंग पर सवाल इसलिए खड़े हो रहे हैं कि इसमें यह कहीं नहीं बताया गया है कि गलागे ने संबंधित अंडरकवर रिपोर्टर को किस तरह की जानकारी मुहैया कराई?
बीसीसीआई के अंपायर ने स्टिंग पर सवाल उठाते हुए कहा, 'कोई भी मौसम और पिच के बारे में क्रिकेट वेबसाइटों से जानकारी मैच से एक दिन पहले ही ले सकता है। इसके अलावा गलागे भारत और पाकिस्तान के बीच अभ्यास मैच के दौरान चौथे अंपायर थे और वे तभी फैसला लेने की स्थिति में आते जब पहले तीनों अंपायरों में से कोई एक उपलब्ध नहीं होता। इसलिए बुनियादी तौर पर फैसले लेने में उनकी कोई भूमिका ही नहीं थी।'
आईसीसी ने सफाई दी है कि जिन अंपायरों पर सवाल उठे हैं, उनमें से कोई भी टी-20 वर्ल्ड कप में शामिल नहीं था। लेकिन आईसीसी ने स्टिंग ऑपरेशन करने वाले चैनल से जानकारी मांगी है ताकि पूरे मामले की जांच की सके। आईसीसी ने इसे गंभीरता से लेते हुए कहा है कि भ्रष्टाचार कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आईसीसी ने एक बयान जारी कर कहा, 'आईसीसी भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी जीरो-टोलरेंस पॉलिसी पर कायम है।
बीसीसीआई की ओर से अंपायरों के कोच के तौर पर नियुक्त बीएस राठौर ने इस बारे में कहा, 'अगर अंपायर अपनी निष्ठा बेचना चाहते हैं, तो आईसीसी ज़्यादा कुछ नहीं कर सकते। इस मामले में सज़ा ऐसी होनी चाहिए जिससे मिसाल बन सके। नहीं तो, यह ऐसी चीज है जो बढ़ती जाएगी। किसी भी मैच से पहले अंपायर किसी से बात नहीं कर सकता, यहां तक कि मीडिया से भी नहीं। पिच या प्लेइंग 11 की तो बात ही छोड़ दीजिए।'