खेल डेस्क. टीम इंडिया नागपुर में अपनी नाक बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। धोनी ब्रिगेड के अंदर अचानक से फाइटिंग स्पिरिट पैदा हो गई है। टीम के खिलाड़ी छोटी-छोटी बात पर उलझ रहे हैं।
रविवार को जॉनेथन ट्रॉट के खिलाफ की गई कॉट बिहाइंड की अपील को ठुकरा दिया गया। इसी साल बेस्ट अंपायर का अवार्ड जीतने वाले श्रीलंका के कुमार धर्मसेना गेंद के बल्ले से टकराने की आवाज नहीं सुन सके और उन्होंने इंग्लैंड के बल्लेबाज को नॉट आउट करार दे दिया।
इस बात पर टीम इंडिया के विराट कोहली और आर अश्विन का पारा चढ़ गया। वे अंपायर और ट्रॉट से जम कर बहस करने लगे। यही नहीं, इस फैसले से खुद कप्तान महेंद्र सिंह धोनी भी थोड़े नाराज दिखे और अंपायर से बहसबाजी करने पहुंच गए।
इस सीन को देख कर इंग्लैंड के दिग्गज जोर-जोर से हंस रहे थे। इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर डेविड लॉयड ने चुटकी लेते हुए ट्विटर पर कहा, "बीसीसीआई चाहता है कि सभी फैसले अंपायरों पर छोड़ दिए जाएं। फिर चाहे वे गलत हो या सही, खिलाड़ी उनके फैसलों को आंख बंद कर स्वीकार कर लें। यह बात शायद उनकी टीम के खिलाड़ियों को नहीं पता।"
सीरीज में एशियाई अंपायरों का परफॉर्मेंस दोयम दर्जे का रहा है। श्रीलंका के धर्मसेना तो जैसे इंग्लिश टीम के लिए विलेन बन कर सीरीज में उंगली उठाते रहे। लेकिन मेहमान टीम ने इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई। वे चुपचाप अपना काम करते रहे और शिकायत करे से बचते रहे।
लेकिन मेजबान टीम के खिलाड़ी शायद इस बात को नोटिस नहीं कर सके। अगर ऐसे फैसले यदि भारतीय खिलाड़ियों के खिलाफ विदेशी टूर पर दिए जाते, तो अब तक तो अंपायर रावण की उपाधि पा चुके होते। देश की सड़कों पर खिलाड़ियों के साथ-साथ नस्लीयभेद के आरोपों के साथ अंपायरों के भी पुतले जल रहे होते।
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