खेल डेस्क. टीम इंडिया के सितारे इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में संघर्ष कर रहे हैं। कभी घर पर शेर रहे भारतीय क्रिकेटर्स अब अपने ही इलाके में भीगी बिल्ली बन गए हैं।
चारों ओर से इन खिलाड़ियों की आलोचना हो रही है। किसी का कहना है कि सचिन तेंडुलकर जैसे बुजुर्गों को अब टीम का जिम्मा जवानों को सौंप कर संन्यास ले लेना चाहिए, तो कुछ का कहना है कि युवाओं में टेस्ट खेलने का दमखम नहीं। वे तो बसे फटाफट क्रिकेट में बल्ला भांजना जानते हैं।
तर्क कुतर्क चाहे कितने भी क्यों न हों, लेकिन क्या कभी किसी ने सोचा है कि इन खिलाड़ियों को नेशनल टीम तक का सफर तय करने के लिए क्या-क्या झेलना पड़ा है। इस टीम में कुछ सितारे ऐसे भी हैं जो तंगी की मार झेलने के बावजूद क्रिकेट के लिए तैयार हुए। उन्होंने कड़ी मेहनत के बाद नेशनल टीम में आने का अपना ख्वाब पूरा किया है और वे टीम को जीत दिलाने के लिए भी जमीं आसमां एक कर रहे हैं। बस अंतर इतना है कि किस्मत इस समय उनका साथ नहीं दे रही।
ऐसे ही एक जुझारू खिलाड़ी हैं रवींद्र जडेजा। गत ६ तारीख को २४ साल के हुए जडेजा ने बड़ी मुश्किलों का सामना करने के बाद अपना आज खड़ा किया है।
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