T-20 WC: किनारे पर पहुंच कर डूबी टीम इंडिया, ये रहे पांच कारण

खेल डेस्क. बीसीसीआई का टोटका काम नहीं आया। आईसीसी ट्वेंटी-20 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया का सफर सुपर-8 स्टेज में ही खत्म हुआ। साउथ अफ्रीका के खिलाफ करो या मरो मैच में धोनी ब्रिगेड (जिसके आधे सिपाही 30 से ज्यादा उम्र के थे) ने 1 रन से रोमांचक जीत तो दर्ज की, लेकिन वह सेमी फाइनल के लिए क्वालिफाई नहीं कर सकी। अंतिम चार में पहुंचने के लिए भारतीय टीम को 32 या उससे अधिक रनों के अंतर से जीतना था, लेकिन फाफ डु प्लेसिस की तूफानी पारी ने उसे महरूम कर दिया। इस हार के बाद विराट कोहली की आंखों से आंसू निकल पड़े तो राजीव शुक्ला ने कहा कि वह टीम के प्रदर्शन से खुश नहीं हैं। सूत्रों के हवाले से मीडिया में यह खबर भी आ रही है कि हार से भड़के कोच डंकन फ्लेचर ने मैच खत्म होते ही खिलाड़ियों की जमकर क्लास ली। फ्लेचर ने अनफिट खिलाड़ियों से तीखे सवाल पूछे और फिटनेस को लेकर सवाल उठाए। (देखें विश्व कप की 25 ऑफबीट तस्वीरें)
भारतीय टीम कम नेट रन रेट के कारण टूर्नामेंट से बाहर हो गई। टी-20 वर्ल्ड कप में पहले मुकाबले के बाद से ही टीम इंडिया के कमजोर बॉलिंग अटैक की चर्चा हो रही थी। धोनी एंड कंपनी ने चार टीमों को टूर्नामेंट के दौरान ऑल आउट तो किया, फिर भी वे ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान जैसी टीमों से पीछे ही रही। न तो टीम के गेंदबाज स्टार साबित हुए, न ही बल्लेबाजों ने चैंपियन जैसा परफॉर्मेंस दिया। क्रिकेट एक्सपर्ट विनोद कांबली ने सीधे तौर पर युवराज,सहवाग और गंभीर को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि टी-20 फॉरमैट में पूरा दारोमदार बल्लेबाजों पर ही होता है। जब बल्लेबाज ही नहीं चले तो आप गेंदबाजों को क्या कहेंगे। (भारत से हार पर भड़का पाकिस्तान)
टूर्नामेंट का पहला सेमी फाइनल मैच श्रीलंका और पाकिस्तान के बीच 4 अक्टूबर को खेला जाएगा। दूसरा सेमी फाइनल उसके अगले दिन यानी 5 अक्टूबर को ऑस्ट्रेलिया और वेस्ट इंडीज के बीच होगा। लेकिन लगातार तीसरी बार भारत सेमीफाइनल से पहले ही मुकाबले से बाहर हो गया है। आखिर क्यों? जानने के लिए क्लिक करें 'नेक्स्ट'...
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