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INSIDE STORY: पाटिल के फोन कॉल पर सचिन को लेना पड़ा संन्‍यास!

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नई दिल्‍ली। शिखर पुरुष 1989 में 16 साल के सचिन रमेश तेंडुलकर जब पाकिस्तान में क्रीज पर उतरे, तो वकार यूनुस का बाउंसर उनके हैलमेट पर लगा, नाक से खून भी आया। उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि छोटे कद का यह खिलाड़ी क्रिकेट के शिखर पर पहुंचेगा और अपनी उपलब्धियों के दम पर क्रिकेट की दुनिया में राज करेगा। रविवार को जब सचिन के वनडे क्रिकेट से संन्‍यास की खबर आई, तब भी किसी ने नहीं सोचा था कि रनवीर सचिन इस तरह वनडे क्रिकेट को अलविदा कहेंगे। (PHOTOS: एक रन आउट के लिए 3 बार सॉरी बोला था मास्टर ब्लास्टर ने!)
 
नागपुर टेस्ट के तीसरे दिन का खेल खत्म होने पर ही सचिन ने फैसला कर लिया था कि वह मैच खत्‍म होने के बाद वनडे क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा कर देंगे। लेकिन क्रिकेट बोर्ड से जुड़े एक शीर्ष अधिकारी ने सलाह दी कि ऐलान से पहले अच्‍छी तरह विचार कर लें, जल्‍दबाजी में फैसला नहीं करें। तब शनिवार की शाम तक भी सचिन तेंडुलकर ने अपने वनडे क्रिकेट के भविष्य पर कोई फैसला नहीं लिया था। सचिन ने खुद को पाकिस्‍तान के खिलाफ चुनी जानी वाली टीम के लिए खुद को उपलब्‍ध रखा था, क्‍योंकि उन्‍होंने बोर्ड को अपने उपलब्‍ध नहीं होने की जानकारी नहीं दी थी। इससे पहले जब भी उन्‍हें नहीं खेलना होता था, वह पहले ही बोर्ड को फोन कर देते थे। लेकिन जब इस बार फोन नहीं गया तो मुख्य चयनकर्ता संदीप पाटिल ने सचिन को फोन किया। संदीप पाटिल ने सचिन को बताया था कि चयनकर्ता मानते हैं कि सचिन का वनडे करियर पूरा हो गया है और अब वह उन्हें टीम में एक और मौका देने की गारंटी नहीं दे सकते। पाटिल ने सचिन को यह भी बताया था कि वो उन्हें टीम से निकालना नहीं चाहते लेकिन उन्हें टीम में बनाए रखना भी मुश्किल काम है। पाटिल ने बताया था कि कई युवा क्रिकेटर टीम में  स्थान बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और बोर्ड की प्राथमिकता 2015 वर्ल्ड कप के लिए टीम तैयार करने की है। PICS: सचि‍न को कि‍या है डक पर आउट, मि‍लि‍ए इंडि‍यन टीम के उभरते सि‍तारे से
 
पाटिल ने सचिन को यह भी सलाह दी थी कि वो वनडे क्रिकेट से आगे बढ़ने के बारे में सोचें। संदीप पाटिल से बात करने के बाद सचिन तेंडुलकर ने वनडे क्रिकेट को अलविदा कहने का फैसला कर लिया। सूत्रों से यह भी पता चला है कि संन्यास की घोषणा से पहले सचिन ने बीसीसीआई प्रमुख एन श्रीनिवासन से भी बातचीत की।
 
सचिन नागपुर टेस्‍ट के बाद ही निराश थे। उन्‍होंने अपना फोन तक बंद कर लिया था। वह किसी से बात नहीं कर रहे थे। उनसे बात करने का मात्र एक ही जरिया था- पत्‍नी अंजलि का फोन। और यह बेहद करीबी लोगों के लिए ही मुमकिन था। इस बीच सचिन ने एकांत में और परिवार के साथ ही ज्‍यादातर वक्‍त बिताया। (पढ़ें- सचिन होने का मतलब)
 
बताया जाता है कि सचिन पर एक तरह से संन्‍यास का दबाव काफी बढ़ गया था। नागपुर टेस्‍ट के बाद जब वह मुंबई के लिए विमान में बैठे तो उन्‍हें सुनील गावस्‍कर से बातचीत करते हुए देखा गया था। गावस्‍कर का कहना है कि सचिन ने यह फैसला दबाव में लिया है।
 
सचिन के खराब फॉर्म को लेकर चयनकर्ता बंटे थे। पाकिस्‍तान के खिलाफ सीरीज के लिए टीम में उन्‍हें रखने को लेकर पांच में से ज्‍यादातर सेलेक्‍टर्स सचिन को टीम में रखने के खिलाफ थे। मुख्‍य चयनकर्ता संदीप पाटिल और बोर्ड अध्‍यक्ष श्रीनिवासन सचिन को टीम में रखने के पक्ष में थे, लेकिन सचिन ने हालात को देखते हुए संन्‍यास के फैसले पर अटल रहना ही बेहतर समझा।
 
आगे की स्‍लाइड में पढ़ें, सचिन तेंडुलकर के वनडे कॅरिअर की पांच बेस्‍ट पारियां
 
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