इंदौर. "हम पहले सैनिक हैं, उसके बाद खिलाड़ी" सेना की क्रिकेट टीम के कप्तान सौमिक चटर्जी द्वारा मैदान पर दिखाया गया संघर्ष जीत के बाद दिए उनके इस कथन को चरितार्थ करता है।
सौमिक ने संघर्षपूर्ण पारी खेलते हुए अपनी टीम को रणजी ट्रॉफी 2013 के सेमी फाइनल में पहुंचा दिया। सर्विसेस की टीम 45 साल बाद इस दौर तक पहुंची है। इससे पहले 1968 में सेना की टीम सेमी फाइनल में पहुंची थी।
फील्डिंग के दौरान सौमिक का घुटना बुरी तरह जख्मी हो गया था। इसके बावजूद वे टीम को बचाने के लिए बल्लेबाजी करने उतरे। ऐसी कंडीशन में दिग्गज से दिग्गज खिलाड़ी रनर के साथ उतरते हैं, लेकिन सौमिक ने अपने जज्बे से सबका दिल जीत लिया। उन्होंने बिना किसी रनर की मदद लिए अपनी टीम को जीत दिलाई।
चटर्जी ने कप्तानी पारी खेलते हुए नाबाद 34 रन बनाए। उन्होंने 46 गेंदों का सामना करते हुए 5 चौकों व 2 छक्कों से सजी 34 रन की पारी खेली।
उत्तर प्रदेश को पांच विकेट से हरा कर सर्विसेस ने सेमी फाइनल की सीट पक्की कर ली।
होलकर क्रिकेट ग्राउंड पर हुए मुकाबले में उत्तर प्रदेश ने पहली पारी में 134 और दूसरी पारी में 241 रन बनाए। सर्विसेस ने रजत पालीवाल के शतक की मदद से जहां पहली पारी में 263 रन बनाए, वहीं आखिरी पारी में मिले 113 रन के टार्गेट को सेना ने 5 विकेट के नुकसान पर हासिल कर लिया।
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