एक ओर गेंहू का खेत, दूसरी और घूड़े का ढेर और बीच में ग्राम समाज की जमीन पर बनी क्रिकेट पिच और पिच पर जारी क्षेत्रिय टूर्नामेंट। एक गेंदबाज अचानक मैच का रुख मोड़ देता है। उसके गेंद थामते ही मैदान में खामोशी छा जाती है। दर्शक जानते हैं मैच का रुख बदलने वाला है। कमेंट्रेटर के मुंह से निकलता है- और सिम्मी की एक और तूफानी गेंद पर बल्लेबाज धराशाई।
पाकिस्तान के खिलाफ दिल्ली वनडे में शमी ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। 22 साल के इस छोरे ने महज 23 रन देकर 1 विकेट चटकाया। उन्होंने सईद अजमल का विकेट लिया। उन्होंने एक छोर से लगातार दबाव बनाए रखा, जिसका फायदा उनके साथ बॉलर भुवनेश्वर कुमार को मिला।
भारतीय क्रिकेट टीम में उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के सहसपुर गांव के रहने वाले खिलाड़ी शमी अहमद के सलेक्शन की खबर मिलते ही मेरे जहन में अमरोहा की स्थानीय क्रिकेट टूर्नामेंटों में छाया रहने वाला उनका खौफ सबसे पहले आया। बचपन से ही सिम्मी (पूरा अमरोहा उन्हें इसी नाम से जानता है) ने अपनी तूफानी गेंदबाजी से एक विशेष पहचान बना ली थी। चाहे बंजर जमीन पर बनी पिच हो, चाहे गेंहू की फसल कटने के बाद खाली खेत में परात चलाकर बनाई पिच है, या फिर घास के मैदान में बनी चिकनी मिट्टी की पिच, सिम्मी की गेंदें हर पिच पर आग उगलती थी। सिम्मी की गेंदों को रक्षात्मक खेलना विपक्षी टीमों की मुख्य रणनीति होती।
आगे क्लिक कर जानिए, अमरोहा के सिम्मी की पूरी कहानी...