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EXCLUSIVE: जानिए, भुवनेश्‍वर और शमी अहमद की अनसुनी कहानी

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अमरोहा. पहला अंतरराष्ट्रीय मैच। वह भी पाकिस्तान के खिलाफ। एक मेडन फेंकना भी मुश्किल। लेकिन एक के बाद एक लगातार चार मैडन ओवर फेंक शमी अहमद ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहचान बना ली। उनकी एक और पहचान है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अमरोहा के रहने वाले शमी धाराप्रवाह बांग्ला बोलते हैं। वे अपना घर छोड़कर पिछले आठ साल से कोलकाता में जो रह रहे हैं। क्रिकेट की खातिर।

तीन भाइयों में सबसे छोटे शमी मां के लाडले हैं। उस वक्त मां को ये समझ ही नहीं आया कि क्रिकेट खेलने के लिए कोलकाता जाने की क्या जरूरत है। उनके दो बड़े भाई यूनिवर्सिटी लेवल तक क्रिकेट खेल चुके हैं। दोनों जानते थे कि यहां गांव में रहते हुए अवसर बहुत कम हैं। पिता तौसिफ अहमद दो बार से गांव के प्रधान हैं, हर ऊंच-नीच समझते हैं। उन्होंने कोच बदरुद्दीन की बात को समझा और शमी को कोलकाता का टिकट मिल गया।
 

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