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Home >> Sports >> Cricket >> Off The Field >> Fixer Asif Salman Butt Gym Incharge Of London Jail

मैदान पर करते थे फिक्सिंग, जेल पहुंचते ही बने 'इंचार्ज' !

Agency | May 08, 2012, 12:02PM IST
 
 

कराची. स्पॉट फिक्सिंग मामले में दोषी पाए जाने पर लंदन की जेल में एक साल की सजा काटने के बाद रिहा हुए पाकिस्तानी तेज गेंदबाज मुहम्मद आसिफ ने कहा है कि पूर्व कप्तान सलमान बट जेल में काफी निराश हैं और खुद को अकेला महसूस कर रहे हैं। वे जेल से बाहर आने का इंतजार कर रहे हैं। मेरी उनके प्रति काफी सहानुभूति है। कई बार उनकी स्थिति काफी दयनीय हो जाती है।

बट लंदन की जेल में 30 महीने की सजा काट रहे हैं। 2010 में पाक टीम जब इंग्लैंड दौरे पर गई थी, तब स्पॉट फिक्सिंग मामले का खुलासा हुआ था। आसिफ को एक साल की सजा हुई थी, जो पिछले शुक्रवार को पूरी हो गई। उनसे पहले तेज गेंदबाज मुहम्मद आमिर छह महीने की सजा काटकर रिहा हुए थे। अब जेल में सिर्फ बट ही हैं। इन तीनों पर आईसीसी ने पांच साल का प्रतिबंध लगा रखा है।

जेल में जिम के इंचार्ज बने थे दोनों

लंदन की जेल में एक साल गुजारने की दास्तां बयां की मुहम्मद आसिफ ने, अभी भी सजा काट रहे हैं सलमान बट। आसिफ ने इस बात का खंडन किया कि उनमें व बट में मतभेद थे। उन्होंने कहा कि जेल में हमारे संबंध ज्यादा प्रगाढ़ हो गए। हम दोनों जेल में भाई की तरह रहते थे। हम दोनों को जिम का इंचार्ज बनाया गया था और हम बैडमिंटन व फुटबॉल खेलते थे।

जेल में मिलने नहीं आए आसिफ के परिजन

पाकिस्तान में अपने परिजनों से आसिफ की फोन पर ही बात होती थी, लेकिन लंदन की जेल में मिलने उनका कोई परिजन नहीं आया। आसिफ ने कहा कि मेरे परिजन लंदन आने का खर्चा वहन करने में असमर्थ थे, इसलिए कभी मिलने लंदन नहीं आए। मुझे फोन पर बात करके ही सुकून मिल जाता था, लेकिन हर समय रिहाई की बात सोचता था।

वहीं सलमान बट की पत्नी, बड़ा बेटा व मां हर महीने उनसे मिलने लंदन जाते थे। उनको खुद खर्च वहन करना पड़ता था। हालांकि बट का छोटा बेटा उनको नहीं देख पाया, क्योंकि उसको वीजा नहीं मिला।

तीन महीने तक एक कमरे रहते थे जेल में

आसिफ ने बताया कि वे और सलमान तीन महीने तक एक ही कमरे में रहते थे। जिस दिन मेरी रिहाई हुई, उस दिन वे काफी निराश थे। बट अपनी रिहाई का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। लंदन की कैंटरबरी जेल के नियम के अनुसार दो विदेशी कैदी एक कमरे में रह सकते हैं।

आसिफ ने बताया कि जेल में जाने पर हमें सबसे पहले यही पूछा गया कि क्या एक कमरे में रहोगे, तो हमने तुरंत हां कर दी, क्योंकि गैर-मुस्लिम कैदी के साथ रहने से थोड़ी परेशानी हो सकती थी।
 
 
 

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