अंतिम गेंद पर मिलती जीत... कहीं फिक्सिंग की फांस तो नहीं?

खेल डेस्क.इंडियन प्रीमियर लीग के पांच खिलाड़ियों को स्पॉट फिक्सिंग के आरोप में निलंबित किया गया है। एक न्यूज चैनल द्वारा किए स्टिंग ऑपरेशन में इन खिलाड़ियों ने मैच में नो बॉल और वाइड डालने के लिए मोटी रकम की डिमांड करते दिखाया गया। मौजूदा सीजन का हर मुकाबला बेहद रोमांचक हो रहा है। मैचों के नतीजे अंतिम गेंद तक खिंच रहे हैं। कहीं इस रोमांच के पीछे फिक्सिंग का तो हाथ नहीं?
आइए एक नजर डालते हैं कुछ ऐसे तथ्यों पर जो कि इस काले धंधे की ओर इशारा करते हैं...
गिरे टीआरपी, तो मैच हुए रोमांचक
आईपीएल-5 जब शुरू हुआ तो हर ओर बस एक ही चर्चा थी। चर्चा इस बात की कि इस साल आईपीएल की टीवी रेटिंग्स में भारी गिरावट दर्ज हुई है। जैसे ही यह खबर मार्केट में आई, वैसे ही मैचों में रोमांच बढ़ने लगा। और देखते ही देखते करीबी मैचों की झड़ी सी लग गई।
इस सीजन सात मैचों का नतीजा अंतिम गेंद पर निकला। इसमें से भी दो मैच रविवार को और एक मैच शनिवार को हुआ था। जबकि शेष चार मैच सोमवार और गुरुवार को खेले गए। सोमवार और गुरुवार को टीआरपी आमतौर पर कम होती है। लेकिन मैच रोमांचक होने के कारण लोगों की रुचि इनमें एकाएक बढ़ गई।
इसमें से चार मैच रात को 8 बजे शुरू हुए थे।
एक सीजन में सात मैच अंतिम गेंद पर
आईपीएल के संक्षिप्त इतिहास में यह पहली बार है जब सात मैचों के नतीजे अंतिम गेंद पर निकले हैं। मौजूदा सीजन को टूर्नामेंट का सबसे रोमांचक सत्र कहा जा रहा है।
2008 में हुए आईपीएल के उद्घाटन सत्र में तीन मैचों का फैसला अंतिम गेंद पर निकला था। इसके बाद 2009 में भी तीन मैच इतने करीबी रहे। आईपीएल-3 में एक भी मैच अंतिम गेंद तक नहीं खिंचा। 2011 में फिर से दो मैच इस रोमांच के साथ खत्म हुए। लेकिन 2012 में तो रोमांच का हर रिकॉर्ड टूट गया।
चेन्नई है इस मामले में किंग
मौजूदा सीजन में अंतिम गेंद पर मैच जीतने में चेन्नई सुपरकिंग्स नंबर 1 है। कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की टीम ने अबतक कुल तीन मैच इस प्रकार से जीते हैं। वहीं मुंबई इंडियंस ने दो बार यह कारनामा किया है।
क्या हो सकता है फायदा?
मैच का नतीजा अंतिम गेंद पर निकलने से सबसे ज्यादा फायदा सटोरियों को मिलता है। मैच पहले तो एक टीम के पक्ष में रहता है, लेकिन अंतिम गेंद पर एकाएक पासा पलटने से सट्टे की पिच पर भी बाजी पलट जाती है। सट्टेबाजों को इससे सबसे ज्यादा फायदा होता है।
नो बॉल से पड़ता है फर्क
टी-20 क्रिकेट में अतिरिक्त गेंदों से मैच के नतीजे पर भी असर पड़ता है। बल्लेबाजी टीम अतिरिक्त गेंद का फायदा उठाकर मैच अपनी झोली में कर लेती है। अंतिम गेंद पर फैसला दूसरी पारी में बल्लेबाजी करने वाली टीम के ही हक में जाता है।





