खेल डेस्क.कॉमनवेल्थ बैंक सीरीज के दूसरे मुकाबले में टीम इंडिया ने श्रीलंका को 4 विकेट से हरा दिया। इस एक जीत ने टीम को बड़ी राहत दी है। लेकिन इस जीत के पीछे विपक्षी टीम की बड़ी भूल का भी हाथ है।
श्रीलंकाई एकादश में एक भी विशुद्ध फिरकी गेंदबाज नहीं खेल रहा था। इसका खामियाजा टीम को उठाना पड़ा। भारत के लिए आर अश्विन ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए दोनों टीमों के बीच बड़ा अंतर खड़ा कर दिया था।
श्रीलंका के पास स्पिनर तो थे, लेकिन सभी पार्टटाइम गेंदबाज हैं। टीम अब तक मुथैया मुरलीधरन का विकल्प खोज पाने में असफल रही है।
श्रीलंका पर्थ वनडे में चार तेज गेंदबाजों के साथ उतरी थी। लासिथ मलिंगा, नुवान कुलसेखरा, एंजलो मैथ्यूज और धम्मिका प्रसाद के साथ-साथ थिसारा परेरा ने भी मध्यम तेज गेंदबाजी की। स्पिन गेंदबाजी के लिए श्रीलंका ने पूर्व कप्तान तिलकरत्ने दिलशान का सहारा लिया। लेकिन दिलशान अकेले कोई भी कमाल करने में नाकाम रहे। दिलशान ने 5 ओवरों में 27 रन खर्च किए और एक भी विकेट नहीं ले सके।
वहीं दूसरी ओर भारतीय एकादश में आर अश्विन एक विशुद्ध फिरकी गेंदबाज थे। साथ ही रवींद्र जडेजा ने भी लेफ्ट आर्म स्पिन गेंदबाजी से कमाल दिखाया। इन दोनों फिरकी गेंदबाजों ने मिलकर चार विकेट झटके। साथ ही रन रेट पर भी नकेल कसकर रखी।
श्रीलंकाई टीम की यह सबसे बड़ी कमजोरी रही। श्रीलंका को मुथैया मुरलीधरन जैसे दिग्गज फिरकी गेंदबाज की कमी खल रही है। पहले मुरलीधरन के साथ-साथ सनथ जयसूर्या भी स्पिन विभाग में टीम की मदद कर देते थे। लेकिन अब टीम के पास इन दोनों दिग्गजों का कोई विकल्प नहीं है।
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