पॉजिटिव न्यूज: संघर्ष से चमका ,स्टिंग से बर्बाद हुआ हॉकी खिलाड़ी
वाराणसी. देश की धार्मिक नगरी वाराणसी के हॉकी खिलाड़ी ललित कुमार उपाध्याय को हाल ही में वर्ल्ड हॉकी सीरीज ( डब्लयूएसएच) में रॉकी ऑफ द ईयर के खिताब से नवाजा गया है पर चार साल पहले एक टीवी चैनल के स्टिंग आपरेशन में नाम आने के बाद उन्हें लगा था कि जिंदगी की रफ्तार थम गयी है और हॉकी स्टिक के साथ वह दोबारा मैदान में नहीं उतर सकेंगें।
ललित उन दिनों महज 17 साल के किशोर थे जब एक रोज टीवी चैनल के पत्रकारों ने उनका नाम एक हॉकी के क्षेत्र में चल रहे भ्रष्टाचार को उजागर करने में इस्तेमाल किया। इस घटना से दुनिया की चालाकियों से अंजान ललित की जिंदगी में जैसे भूचाल आ गया। उनके खिलाफ हुई कार्रवाई से उसका दिल तो टूटा लेकिन हौसला नहीं। मजबूत इरादों वाले ललित ने दोबारा स्टिक उठाई और अपने प्रदर्शन से चयनकर्ताओं को मजबूर कर दिया कि वह उसे मौका दें।
अप्रैल 2008 में टीवी चैनल के पत्रकारों ने हॉकी फेडरेशन के तत्कालीन महासचिव के ज्योतिकुमारन का स्टिंग आपरेशन किया। इसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश के स्पोर्ट्स प्रमोटर्स का रूप धर के उनसे कहा कि अगर उनके क्षेत्र के एक पसंदीदा खिलाड़ी को वह भारतीय टीम में जगह दे दें तो वे टीम के प्रायोजक बनने को तैयार हैं।
टीवी चैनल ने जब इसका प्रसारण किया तो ललित का नाम हटा दिया लेकिन उसके बाद से यह कयास लगने शुरू हो गये कि आखिरकार वह खिलाड़ी कौन था जिसको टीम में शामिल करने की बात हो रही थी। लोगों का शक वाराणसी के इस लड़के की तरफ गया क्योंकि उत्तरप्रदेश की तरफ से टीम में खेल रहे वह एकमात्र खिलाड़ी थे। तब भी लोगों की जुबां सिली हुई थी लेकिन आंखों में शुबहे की नजर बन गयी।
इस मामले की जब जांच शुरू हुई तो ललित का नाम कुछ अधिकारियों ने ‘लीक’ कर दिया और इसके बाद ललित की जिंदगी में अंधेरे घिर गये। यह जानते हुये भी कि उसका नाम स्टिंग आपरेशन में महज भ्रष्टाचार को उजागर करने में इस्तेमाल किया गया है ,ललित को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। उस रोज ललित का चेहरा आंसुओं से भर गया और वह हर एक से यही सवाल पूछ रहे थे आखिर क्यों उनके ही साथ ऐसा हुआ।
ऐसे हालातों में पूर्व कप्तान धनराज पिल्लै उनके लिए मसीहा साबित हुये। पिल्लै ने उनके लिए एयर इंडिया से बात की और ललित को इस कंपनी की ओर से खेलने की अनुमति मिल गई। उन्हें जूनियर भारतीय टीम के साथ साल 2009 में मलेशिया जाने का मौका मिला।
ललित की मुसीबतों का अंत तो नहीं हुआ मगर इससे उन्हें जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने का एक मौका जरूर मिला। लोगों की घूरती निगाहें लगातार एक ही ताना मारती दिखती कि घूस देकर खेल रहा है। बार बार सफाई देने के बाद भी लोग यही मानते थे कि दाल में कुछ काला है। परेशान ललित ने इसका जवाब मैदान में देने की ठान ली। ललित के सामने यही लक्ष्य था कि अपने खेल से साबित कर दे कि वह मजबूत खिलाड़ी है और बीती बातों को अपने जौहर के ताब से बौना साबित कर दे।
यह मौका मिला उसे डब्ल्यूएसएच में मिला और उसने दस लाख रूपये की इनामी राशि का पुरस्कार अपनी झोली में डालके जीवन में आये पतझड़ के मौसम को अलविदा कह दिया।
पिल्लै का कहना है कि आज देश में उससे बेहतर राइट इन और राइट आउट पोजीशन पर खेलने वाला खिलाड़ी नहीं है।
पूर्व राष्ट्रीय कोच जोकिम कारवाल्हो से पाकिस्तान के महान पूर्व हाकी खिलाड़ी शाहबाज अहमद ने कहा कि यह लड़का ललित मेरी तरह खेलता है। बहुत प्रतिभावान प्लेयर है ललित। एक बार क्रिकेट खिलाड़ी डॉन ब्रैडमैन ने सचिन तेंदुलकर के लिए भी यही कहा था। और सचिन एक के बाद कीर्तिमान बनाते गये।
ललित से ऐसी उम्मीद करना बेमानी तो नहीं होगा। बहरहाल इतना हो जाने के बाद भी ललित यह पूछ ही डालते हैं कि बलि का बकरा बनना आखिर उनकी ही किस्मत में क्यों लिखा था।







