शारीरिक छेड़छाड़, सीटी बजाना, मनचलों का हॉर्न बजाना, अभद्र टिप्पणियां करना या फिर दफ्तर में द्विअर्थी फब्तियां कसना ऐसे अपराध हैं जिनका सामना ब्रिटिश महिलाएं हर रोज करती हैं। सिर्फ ब्रिटेन ही क्या दुनियाभर में महिलाएं इस तरह के अपराधों से रोज जूझती हैं। भारत में भी महिलाओं के यौन और घरेलू हिंसा झेलना आम बात हो गई है। पूर्व मिस वर्ल्ड युक्ता मुखी तक ने पति के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। हाल ही में दिल्ली मेट्रो में दिल दहला देने वाली घटना का जिक्र एक लड़की ने अपने ब्लॉग पर किया था। ब्रिटेन में एक लड़की ने वेबसाइट के जरिए इसके खिलाफ जंग छेड़ दी है।
फ्रांसिसी पत्रिका में प्रकाशित हुई ब्रिटिश शाही परिवार की बहू की केट मिडिलटन की टॉपलेस तस्वीरें भी महिलाओं के प्रति पुरुष मानसिकता का ताजा उदाहरण हैं। महिलाओं किसी न किसी रूप में पुरुषों की लालसाओं की कीमत चुकाती हैं। केट की तस्वीरों को तो बेचने तक की तैयारी की जा रही हैं।
'एवरीडे सेक्सिज्म' नाम की इस वेबसाइट पर महिलाएं अपने साथ हुई ऐसी ही घटनाओं पर टिप्पणियां कर रही हैं और अपने अनुभव साझा कर रही हैं। एक युवती ने अपनी अनुभव साझा करते हुए लिखा है (आगे क्लिक करके पढ़िए) कि जब उसके दोस्त ने बलात्कार किया था तो उसकी मां के सवालों ने उसे ज्यादा शर्मसार किया था।
26 वर्षीय लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता लौरा बेट्स द्वारा शुरु किया गया यह प्रोजेक्ट महिलाओं को अपनी बात रखने का मौका दे रहा है। बेट्स का कहना है कि प्रोजेक्ट का मकसद सिर्फ यह बताना है कि रोजमर्रा की जिंदगी में किए जाने वाले यौन अपराध महिलाओं पर क्या असर डालते हैं और वे कितने भयानक हैं।
लौरा ने पांच महीने पहले वेबसाइट शुरु की थी। उन्होंने इसकी कोई खास पब्लिसिटी नहीं की और ट्विटर संदेशों और लोगों की स्वंय की ओर से की जाने वाली पब्लिसिटी पर ही भरोसा किया। बेट्स का उद्देश्य महिलाओं के लिए एक ऐसा फोरम शुरु करना था जहां वो खुलकर अपनी बात रख सकें।
वेबसाइट का सूत्र वाक्य कहता है, 'अपना असली नाम बताकर या नाम छुपाकर कितना ज्यादा या कितनी कम अपनी बात कहनी है, यह आप पर नर्भर करता है। अपनी बात साझा करके आप दुनिया को यह दिखा रहे हैं कि दुनिया में यौन अपराध हो रहे हैं। महिलाएं इनका रोज शिकार होती हैं और चर्चा करने के लिए यह जायज मुद्दा है।'
अमेरिकी समाचार वेबसाइट हफिंग्टन पोस्ट से बातचीत में लौरा ने कहा, 'मैंने सिर्फ इसका ट्विटर पेज बनाया था और अपने फेसबुक प्रोफाइल पर शुरु किया था और अब यह संदेश जंगल की आग की तरह फैल रहा है। अब तक हमें पांच हजार से ज्यादा संदेश मिले हैं जिनमें से 4 हजार पिछले महीने ही आए हैं।'
महिलाओं ने अपने साथ हुए यौन अपराधों का जिक्र किया है। किसी को गली में दबोच लिया गया तो किसी को क्लब में। कोई अपने ऑफिस में उत्पीड़न का शिकार हो रही है तो किसी का दफ्तर तक जाना दूभर है।
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