जब मैं 18 साल की थी तब एक दोस्त के घर हुई पार्टी में मेरे साथ बलात्कार हुआ था। जिस वक्त यह हुआ उस वक्त मैं नशे में थी।
कुछ दिन बाद हिम्मत जुटाकर मैंने अपनी मां के साथ यह अनुभव शेयर किया। उन्होंने पूछा, 'क्या तुम्हें पूरा यकीन है कि तुम उस लड़के को पसंद नहीं करती हो, हो सकता है हालात में ऐसा हो गया हो।'
मैं यह नहीं भूल सकती कि मां के उन दो सवालों ने मुझे कैसा महसूस कराया। मुझे गुस्सा आया, असमंजस हुआ, शर्म आई और मैं अपनी ही नजरों में गिर गई। इस घटना को चार साल बीत गए हैं और यह मेरे दिमाग में अभी भी ताजा है। मुझे लगता है कि इस अनुभव को नया नाम दिया जाना चाहिए।