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जानिए, बॉल प्वाइंट पेन के बारे में कुछ रोचक बातें

dainikbhaskar.com | Jun 17, 2013, 09:37AM IST
जानिए, बॉल प्वाइंट पेन के बारे में कुछ रोचक बातें
जिस बॉल प्वाइंट पेन से आज आप लिख रहे हैं, उसका निर्माण आज से 75 साल पहले हुआ था। हंगरी के लैस्ज़लों बिरो ने इसे बनाया था। एक दिन बुडापेस्ट की प्रिंटिंग शॉप में उन्होंने देखा कि एक इंक पेपर में लगते ही सूख जाती थी। इससे उन्हें विचार आया कि इस प्रक्रिया का प्रयोग पेन बनाने में भी किया जा सकता है। इसके बाद ये स्याही उन्होंने फाउंटेन पेन में डाली। मगर, स्याही इतनी गाढ़ी थी कि वह पेन से नीचे नहीं उतर रही थी। 
 
कई सालों की मेहनत के बाद उन्होंने निब की जगह बाल बेयरिंग की टिप लगा दी। यह इंक कार्टरेज से स्याही लेती थी और उसे कागज पर समान रूप से फैला देती थी। शुरुआती बाल प्वाइंट पेन जहां गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत पर काम करते थे। ब्रियो ने प्रेशराइज्ड ट्यूब और कैपलरी एक्शन से स्याही को फैलने या लीक होने से रोकता है।
 
बिरो ने जून 1938 को इसका ब्रिटिश पेटेंट कराया। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद उन्हें हंगरी छोडऩे पर मजबूर होना पड़ा। इसके बाद अर्जेन्टीना में बसे बिरो और उसके भाई जॉर्ज ने 1944 में छोटे पैमाने पर पेन का उत्पादन शुरू किया। उनको पहला बड़े पैमाने पर मिला ऑर्डर रॉयल एयर फोर्स से था। उन्होंने 30 हजार पेन का ऑर्डर दिया था ताकि नेविगेटर अधिक ऊंचाई पर लिखने पर परेशानी न हो क्योंकि वहां फाउंटेन पेन की स्याही लीक हो जाती थी।
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