Mayank Saxena
अगर प्रणब मुखर्जी एक बार अपने 300 कमरों के घर के बाहर आ जाते, तो शायद भीड़ शांत हो गई होती...राष्ट्राध्यक्ष अगर जनता से सीधे मुखातिब नहीं हो सकता...तो 15 अगस्त और 26 जनवरी पर हम क्यों सुनें उनके राष्ट्र के नाम संदेश को...धिक्कार है।
ओबामा ही बेहतर हैं, रेस्टोरेंट में भी चले जाते हैं...त्योहारों पर जनता से मिल भी लेते हैं...बच्चों को देख लाड़ भी जता लेते हैं।