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'सेक्‍स जिंदगी में है तो साहित्‍य में क्‍यों नहीं, इसे पोर्न कहना है बकवास'

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आगरा. सार्क साहित्‍य उत्‍सव में भी ‘साहित्‍य में सेक्‍स’ का मुद्दा पहुंच गया। रविवार को शुरू हुए इस उत्‍सव में पाकिस्‍तानी साहित्‍यकार व पत्रकार फरहीन चौधरी ने कहा कि, सेक्‍स जिंदगी में है तो साहित्‍य में क्‍यों नहीं हो सकता। इसे पोर्न कहना बकवास है। समाज बदल रहा है। इसमें कई ऐसी चीजें हो रही हैं, जिसे खुले तौर पर लोग स्‍वीकार नहीं कर सकते हैं। इस बदलाव को साहित्‍यकार लिखता है तो यह गलत नहीं है।
 
दरअसल, आगरा में ताज लिट्रेचर फेस्टिवल से ही साहित्‍य में अश्‍लीलता को लेकर जबरदस्‍त द्वंद्व चल रहा है। एक से तीन फरवरी तक चले ताज लिट्रेचर फेस्टिवल में लंदन में रहने वाले एनआरआई लेखक रेजिनाल्‍ड मैस्‍से ने लेखिका शोभा डे को ‘सॉफ्ट पोर्न राइटर’ कह दिया था। 
 
तस्वीरों के जरिए जानिए सेक्स के बारे में क्या सोचते हैं साहित्यकार...

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