लखनऊ. नेताजी सुभाष चंद्र बोस के गुमनामी बाबा होने का एक बार फिर से दावा किया गया है। सुभाष चंद्र बोस राष्ट्रीय विचार केंद्र के सचिव शक्ति सिंह, विधायक अखिलेश सिंह और उनके सहयोगी अनुज धर ने बाकायदा प्रेस कान्फ्रेंस करके न सिर्फ यह दावा किया है, बल्कि गुमनामी बाबा ही नेताजी थे, इस बारे में कई सबूत भी पेश किए। इनका कहना है कि फैजाबाद के रामभवन में दो वर्ष तक रहे स्व.गुमनामी बाबा उर्फ भगवनजी ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस थे। इस दौरान प्रदेश सरकार से अपील की गई कि वह अदालत के आदेश का अनुपालन करते हुए जांच कमेटी गठित करे और तीन महीने में अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंपे।
अनुज धर ने बताया कि सबूतों से साबित होता है कि भगवनजी को भय था कि उनके सामने आते ही कई देश उनके पीछे पड़ जाएंगे। उन्होंने एक पत्र में लिखा है कि मेरा जनता के सामने आना उचित नहीं है। उन्हें विश्वास था कि उन्हें भारत सरकार की सहमति से ही उन्हें युद्ध अपराधी घोषित किया गया है। उनका यह भी दावा था कि 1947 के सत्ता हस्तांतरण के अभिलेख सार्वजनिक किए जाएंगे तो भारत के लोग जान जाएंगे कि वह अज्ञातवास में जाने पर क्यों विवश हुए थे?
उत्तर प्रदेश के 09 फरवरी को प्रमुख समाचार