राज्यदिल्ली
मध्य प्रदेश
राजस्थान
छत्तीसगढ़
हिमाचल
पंजाब
हरियाणा
चंडीगढ़
उत्तर प्रदेश
बिहार
झारखंड
महाराष्ट्र
गुजरात
जम्मू-कश्मीर
जयललिता के गढ़ में साइकिल चलाएंगे मुलायम-अखिलेश
अनुराग सिंह | Feb 25, 2013, 09:10AM IST

लखनऊ. प्रदेश की सत्ताधारी समाजवादी पार्टी और मुख्य विपक्षी बहुजन समाज पार्टी के बीच दो दशक से चल रहे युद्ध की नयी रणभूमि अब देश का दक्षिण कोना होगा। पिछले वर्ष हुये यूपी विधानसभा चुनाव में बसपा सुप्रीमो मायावती के हाथों से सत्ता छीनने के बाद मुलायम सिंह यादव ने तमिलनाडु में हाथी की रफ्तार पर विराम लगाने की रणनीति तैयार की है। AIADMK सुप्रीमो जयललिता के गढ़ में बहुजन समाज पार्टी तेजी से अपनी जड़ें जमा रही है जिसके मद्देनजर सपा सुप्रीमो ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ मार्च मध्य में वहां जाने का कार्यक्रम तैयार किया है।
उन्हें इस बात की बखूबी मालूमात है कि केन्द्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबन्धन की सरकार की गलत नीतियों की वजह से जनता की नाराजगी उन्हें बड़ा सियासी लाभ पहुंचा सकती है और इसीलिए वह देश के किसी भी कोने में लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं। सपा मुखिया ने उत्तर प्रदेश की तर्ज पर तमिलनाडु में भी सपा को खड़ा करने का मौलिक मंत्र खोज निकाला है। मुलायम सिंह यादव ने तमिलनाडु में दूध व उससे बने उत्पादों का व्यवसाय करने वाले लोगों पर अपना पूरा ध्यान केन्द्रित कर लिया है।
अति पिछड़ी जातियों में शुमार यह लोग कोयम्बटूर, त्रिपुर, सैलम, नामाकल और ईरोर जिलों में बहुतायत में हैं। इन पांच जिलों में उनका प्रतिशत करीब साठ है। तमिलनाडु से समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बीआर दामोदरन के मुताबिक़ मुलायम सिंह यादव ने उनसे मार्च मध्य में तमिलनाडु आने की बात कही है। वह अखिलेश यादव के साथ चेन्नई में एक बड़ी सभा तो करेंगे ही, साथ इन पांच जिलों में भी उनकी सभाओं का कार्यक्रम है। दामोदरन ने कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी पांच लोकसभा सीटों से चुनाव लड़ने का मन बना रही है, जहां गवन्डर्स की खासी आबादी है।
तमिलनाडु में गवन्डर्स समाजवादी पार्टी के समर्थक के रूप में उभर रहे हैं। दामोदरन का कहना है कि तमिलनाडु में बहुजन समाज पार्टी ने अपनी जड़ें गहरी करनी शुरू कर दी हैं। चेन्नई, त्रिवल्लूर और कांजीपुरम में बसपा की खासी दखल है। तमिलनाडु में बहुजन समाज पार्टी के बढ़ते दखल की जानकारी के बाद से समाजवादी पार्टी में बेचैनी है।







