सपना (काल्पनिक नाम) ने बताया कि तकरीबन 25 साल पहले वह राजस्थान से यहां आई। उससे पहले उसकी मां और उसकी नानी भी यही काम करती थीं। पर यहां आकर सपना ने अपने बच्चों से ये काम न कराने की सोची। कबाड़ी बाजार में ही सपना ने एक बेटी और एक बेटे को जन्म दिया। दोनों जब पढ़ने लिखने की उम्र के हुए तो दोनों को बोर्डिंग में भर्ती करा दिया। सपना का बेटा पढ़ने में तेज था। सपना ने बताया कि पहले उसे दिल्ली और उसके बाद पूना में पढ़ाया।