कुंभ कैंपस. संगम के तट पर बसे आस्था के शहर में जहां अध्यात्म की अपार दौलत बरस रही है, जहां कई आश्रमों में लाखों-करोड़ों का खर्च कर महलनुमा पंडाल बनाए गए हैं, जहां 24 घंटे 56 भोग खाए जा रहे हैं, वहीं एक इलाका ऐसा भी है, जहां लोग बांस के महज़ चार फीट लंबे पंडालों में जीने को मजबूर हैं। इन आश्रमों की जूठन खाने को मजबूर हैं। आश्रम के भंडारों से एकत्रित किए गए इन खानों को खुद भी खाते हैं और शेष सुखा कर अपने मवेशियों को खिलाते हैं।
त्रिवेणी तट पर लगे अमृत कुंभ क्षेत्र में जैसे ही प्रवेश करेंगे यहां बने अखाड़ों की चकाचौंध को देख हैरत में पड़ जाएंगे। एक-एक अखाड़े में करोड़ों का खर्च किया गया है। जहां भी नज़र जाती है, अध्यात्म की दौलत की चकाचौंध से आंखें फटी की फटी रह जाती हैं। बाबा बड़ी-बड़ी लग्जरी गाड़ियों में घूमते नज़र आ जाएंगे। लेकिन इस आध्यात्मिक नगर में एक इलाक़ा ऐसा भी है, जहां का नज़ारा देख आपका कलेजा मुंह को आ जाएगा।
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महाकुंभ टीम-
फोटो: प्रभात वर्मा और श्याम वर्मा
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