इलाहाबाद में चल रहे महाकुंभ में आये विदेशी सैलानी सिर्फ गंगा-यमुना-विलुप्त सरस्वती के त्रिवेणी संगम में सिर्फ डुबकी ही नहीं लगा रहे हैं। भक्ति और आध्यात्म के रस में डूबे इन विदेशियों ने एक और बेड़ा उठाया है मोक्षदायिनी और जीवनदायिनी कही जाने वाली गंगा नदी को प्रदूषण से मुक्त कराने का। एक तरफ जहां आम श्रद्धालु गंगा में डुबकी लगाकर घरों की ओर भाग रहे हैं वहीं विदेशी उसे साफ करने में लगे हैं। श्रद्धालुओं द्वारा फेंका जा रहा कचरा ये विदेशी सैलानी गंगा से बटोर रहे हैं।
तमाम विदेशी सैलानी जहां एक तरफ रोजाना गंगा में डुबकी लगाकर अपनी आस्था का इजहार कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर वो सभी इसमें फ़ैली गंदगी को बाहर निकालकर रोजाना घंटों गंगा के घाटों की सफाई भी कर रहे हैं, ये विदेशी खुद कूड़ा बिन रहे हैं, गंदगी साफ़ कर रहे हैं और कुम्भ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को गंगा और इसके घाटों को गंदा न करने का संकल्प भी दिला रहे हैं।
अलग- अलग देशों से आए यह गंगा भक्त लाखों-करोड़ों के जीवन को तारने वाली पतितपावनी की हालत से काफी दुखी हैं। ज्यादा कुछ तो यह कर नहीं सकते, लेकिन मेले में जिन जगहों पर यह रह रहे हैं वहाँ यह रोजाना तीन से चार घंटे तक गंगा में बहने वाले कूड़े को बिनते हैं, उसकी गंदगी को निकालते हैं और घाटों की सफाई करते हैं। कुम्भ मेले में आने के बाद से गंगा की सफाई इनकी ज़िन्दगी का अहम् हिस्सा और मकसद बन गया है।
इन विदेशियों का कहना है कि गंगा का प्रदूषण इसके रुतबे में चाँद के दाग की तरह है जिसे हर हाल में दूर किया जाना चाहिए। इनके मुताबिक़ गंगा की सेवा कर इन्हें जो सुकून मिलता है उसे वह बयान नहीं कर सकते। यह गंगा भक्त विदेशी स्वामी चिदानंद द्वारा संचालित हरिद्वार के परमार्थ आश्रम के कैम्प में रुके हुए हैं। गंगा के प्रति आस्था और दर्द को देखकर तमाम भारतीय भी इनके अभियान से जुड़ गए हैं।
कुम्भ मेले के अलग- अलग कैम्पों में ठहरे सैकड़ों श्रद्धालु और तीर्थयात्री भी गंगा सफाई में इनका हाथ बंटा रहे हैं। इतना ही नहीं सात समंदर पार से आए यह विदेशी मेहमान कुम्भ मेले में आये तीर्थयात्रियों से गंगा को दूषित ना करने का संकल्प भी दिला रहे हैं। गंगा के प्रति इनकी पीड़ा किसी को भी झकझोर देने के लिए काफी है।