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कैसे होती है कुंभ में आने वाले लाखों लोगों की गिनती, जानिए

Maha kumbh Desk | Feb 03, 2013, 07:00AM IST
कैसे होती है कुंभ में आने वाले लाखों लोगों की गिनती, जानिए
कुंभ कैंपस. दुनिया के सबसे बड़े धर्मिक मेले महाकुंभ में करोड़ों लोग डुबकी लगाने के लिए आ रहे हैं। 55 दिन तक चलने वाले इस महा आयोजन में आने लोगों का विश्वास होता है कि गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम में डुबकी लगाने से उनके सभी पाप धुल जाते हैं। यही कारण है कि यहां करीब दो महीनों तक लोगों का मेला लगा रहता है। साधु-संन्य़ासी यहां डेरा डाले रहते हैं। मेला प्रशासन के मुताबिक पूरे मेलावधि में कुल 10 करोड़ लोगों के आने की संभावना है। पर यक्ष प्रश्न यह है कि इतने लोगों की गिनती कैसे होती है? इसका आधार क्या है? 
 
इस महा आयोजन के महागिनती की पूरी जिम्मेदारी सिर्फ दो लोगों के कंधों पर है। ये हैं, इलाहाबाद के आयुक्त देवेश चतुर्वेदी और इलाहाबाद शहर में पुलिस महानिरीक्षक आलोक शर्मा। पहले शाही स्नान में मेला प्रशासन द्वारा कुल 85 लाख लोगों के स्नान का दावा किया गया। लेकिन आलोक शर्मा के आकलन से यह आकंड़ा काफी भिन्न है। शर्मा के मुताबिक, उनके अनुमान के अनुसार पहले दिन सिर्फ 15 से 18 लाख लोगों ने स्नान किया था।
 

दैनिकभास्कर.कॉम से खास बातचीत में पुलिस महानिरीक्षक आलोक शर्मा ने बताया कि हम तीन प्रमुख विधियों से मेले में आने वाले लोगों की गिनती करते हैं। मेले की तरफ आने वाली सड़कों पर से गुजरने वाली तीर्थयात्रियों की भीड़ की गिनती एक खास तरीके से की जाती है। कुंभ कैंपस की तरफ कुल 12 सड़कें आती हैं। इनमें फ्लाई ओवर को शामिल नहीं किया जाता है। इन पर एक मीटर की दूरी के अंदर एक घंटे में गुजरने वाली कुल भीड़ के आधार पर लोगों की संख्या निकाली जाती है। इसके साथ ही नावों और ट्रेनों से आने वाले लोगों की संख्या भी गिनी जाती है। मेले में कैंप लगा कर रह रहे साधु-संतों और उनके कैंप में आने वाले लोगों की संख्या गिनी जाती है। शहर में रह रहे लोगों और कैंप के लोंगों की कुल संख्या का जोड़ भी किया जाता है। 
 
शर्मा के मुताबाकि, महाकुंभ की महागिनती के लिए उपग्रह का इस्तेमाल सटीक नहीं होता है। हरिद्वार कुंभ मेले में उपग्रह चित्रों के आधार पर एक करोड़ 60 लाख लोग आए थे। जबकि यह सही नहीं था। मेले में एक व्यक्ति यदि 10 बार आता है तो उपग्रह उसकी गिनती 10 बार करता है। ऐसे में सही गिनती संभव नहीं है। मकर संक्रांति में 85 लाख तीर्थयात्रियों के आने के दावे पर वह कहते हैं, 'देश कुल जनसंख्या के मुताबिक हर 14 आदमी कुंभ मेले आना चाहिए। अपने आस-पास के हर 14 शख्स से पूछिए कि क्या वह कुंभ मेले में गया था? इसका सही उत्तर खुद मिल जाएगा। एक शख्स मेले में कई बार जाता है, इसलिए उसकी गिनती भी कई बार होती है, ऐसे में लोगों की संख्या बढ़ी हुई लगती है।'

 
 
स्लाइड के जरिए जानिए किस तरह से होती है महागिनती...
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