महाकुंभ कैंपस. ठंडा पड़ चुका राम मंदिर आंदोलन इस कड़ाके की ठंड में गरम हो सकता है। इलाहाबाद में हो रहे महाकुंभ मेले में भगवा ब्रिगेड द्वारा फिर से राम मंदिर आन्दोलन को गरमाने की तैयारी की जा रही है। यदि विश्व हिन्दू परिषद् से जुडे लोगों की माने तो महाकुम्भ में राम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय आन्दोलन का शंखनाद होगा।
श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष एवं मणि रामदास छावनी के महंत नृत्यगोपाल दास ने अयोध्या में स्थित श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण में वोट बैंक को सबसे बड़ी बाधा बताया है। उन्होंने कहा है कि आगामी महाकुंभ मेले में इस संबंध में कोई ठोस निर्णय लिया जा सकता है। देश की वर्तमान परिस्थिति चिंताजनक है। धार्मिक, आध्यात्मिक तथा राष्ट्र का वातावरण हर प्रकार से दूषित किया जा रहा है। ऐसे समस्याओं का निदान ढूंढऩा ही होगा।
उन्होंने कहा कि पूर्व में भी कुंभ, अद्र्धकुंभ एवं मेले के दौरान संत व धर्माचार्य राष्ट्रीय समस्याओं पर चिंतन-मनन करते रहे हैं। इसलिए हिंदू संसद के गठन की मांग स्वाभाविक है। विवादित श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण में वोट बैंक सबसे बड़ी बाधा है। न्यास के अध्यक्ष ने कहा कि 14 जनवरी से प्रारंभ हो रहे महाकुंभ मेले के दौरान आयोजित संत महासम्मेलन में इस पर विचार कर निर्णय लेंगे। करके संतों के एकमत होने के पश्चात मंदिर निर्माण के लिए कोई ठोस निर्णय लिया जा सकता है। मंदिर निर्माण की तिथि तक की घोषणा कुंभ में की जा सकती है।
विश्व हिन्दू परिषद् से जुडे संतों की सर्वोच्च संस्था केन्द्रीय मार्गदर्शक मंडल की महाकुम्भ के दौरान होने वाली बैठक में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए एक देशव्यापी आन्दोलन की होगी रूपरेखा तैयार। विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता शरद शर्मा के मुताबिक़ छ फरवरी को महाकुम्भ में होगी केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की एक अहम् बैठक जिमसे विहिप से जुडे 300-350 प्रमुख संत शामिल होंगे।
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