कुंभ कैंपस. मौनी अमावस्या पर रविवार शाम इलाहाबाद रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ में 36 लोगों की मौत हो गई। 50 गंभीर रूप से घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस घटना ने यूपी सहित पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना ने प्रयाग महाकुंभ मेले में करीब 60 साल पहले हुई उस भगदड़ की याद दिला दी, जिसमें करीब 800 लोगों की जान चली गई थी और करीब 2000 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।
बताते चलें कि 3 फरवरी, 1954 के कुंभ मेले में मौनी अमावस्या के स्नान पर्व पर हुई भगदड़ में करीब 800 श्रद्धालुओं की मौत हुई थी। बताया जाता है कि 2 और 3 फरवरी की दरमियानी रात को गंगा में अचानक बहुत पानी बढ़ गया। संगम किनारे साधु-संतों के आश्रम में पानी पहुंचने लगा। इस घटना से लोग घबड़ा गए। इससे अफरा-तफरी में भगदड़ मच गई।
1954 के कुंभ में तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू भी शामिल हुए थे। हादसे के बाद पं. नेहरू ने न्यायमूर्ति कमलाकांत वर्मा की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाई। हादसे के बाद पंडित नेहरू ने नेताओं और अतिविशिष्ट लोगों से स्नान पर्वों पर कुंभ न जाने की अपील की थी। उस घटना के बाद से कुंभ में कभी भगदड़ नहीं मची थी।
सन् 1954 में हुए महाकुंभ की दुर्लभ तस्वीरें...
स्लाइड के जरिए जानिए यूपी में कब-कब हुई भगदड़...