इलाहाबाद. कुंभ क्षेत्र में बसंत पंचमी के मौके पर परिवार सहित संगम तट पर स्नान करना लखनऊ के हाई प्रोफाइल डीआईजी नवनीत सिकेरा को महंगा पड़ सकता है। सिकेरा पर आरोप है कि संगम में मुख्य स्नान पर्व पर वह अपने परिजनों के साथ कुंभ स्नान करने पहुंचे थे। लेकिन मौके पर मीडियाकर्मी पहुंच गए तो अपनी गलती छुपाने के लिए डीआईजी को तौलिये से मुंह छुपाकर नंगे पैर भागना पड़ा।
बीते 10 फ़रवरी को मौनी अमावस्या के दिन हुए इलाहाबाद रेलवे स्टेशन पर हुए हादसे में 37 लोगों ने अपनी जान गवाईं थी। इस घटना के बाद हाई कोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए शाही स्नान में किसी भी वीआईपी को अपनी गाड़ी से आने जाने से मना किया था। हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद लखनऊ के डीआईजी नवनीत सिकेरा शुक्रवार को अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ कुंभ मेला स्नान के लिए गाड़ी से पहुंचे।.जब मीडिया वालों की नजर उन पर पड़ी तो वे मुंह छुपाकार नंगे पांव भागते नजर आए।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी लखनऊ के डीआईजी खुद इसका उल्लंघन करते नजर आये। जब उन से इस आदेश के बारे में पूछा गया तब उन्होंने हाई कोर्ट के आदेश से अनभिज्ञता जताई। मीडियावालों के सवालों का जवाब देने के बजाय डीआईजी अपनी गाड़ी में बैठ गए। जब उन्हें लगा कि मामला तूल पकड़ सकता है तो उन्होंने अपनी सफाई में केवल इतना ही कहा की उन्हें हाईकोर्ट के आदेश की जानकारी नहीं है।
यूपी के नगर विकास मंत्री और कुंभ मेला के प्रभारी मंत्री आजम खान ने अब इस पूरे मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। इस मामले में इलाहबाद के कमिश्नर देवेश चतुर्वेदी ने कहा है कि हाईकोर्ट के आदेश के बारे में सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को लिखित तौर पर जानकारी दे दी गई थी। इसके बावजूद अगर इस तरह की बातें सामने आती है तो इस पर जांच होगी। इससे पहले वीआईपी स्नान का एक मामला और सामने आया। बीएसएफ के डीजी सुभाष जोशी पर भी आरोप है कि वह अपनी सरकारी कार में सवार होकर परिवार के साथ संगम में स्नान करने पहुंचे थे।
कार्यवाही नहीं तो खटखटाएंगी कोर्ट का दरवाजा
सामाजिक कार्यकर्त्ता नूतन ठाकुर ने आज कुम्भ मेला में बीएसएफ के डीजीपी सुभाष जोशी और लखनऊ रेंज के डीआईजी नवनीत सिकेरा द्वारा अपने परिवार के लोगों के साथ सरकारी वाहन का प्रयोग कर वीआईपी घाट पर जाने के बारे में गृह मंत्री भारत सरकार और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री/गृह मंत्री को पत्र लिख कर इन दोनों तथा अन्य जिम्मेदार मेला अधिकारियों के संबंध में पन्द्रह दिनों में जांच करा कर कार्यवाही करने की मांग की है। ठाकुर ने हाई कोर्ट के आदेशों के खुलेआम उल्लंघन के परिप्रेक्ष्य में यह मांग की है। यदि सात दिनों में न्यायोचित कार्यवाही नहीं की जाती है तो वे कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाएंगी।
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