कुंभ कैंपस. श्रंगार सिर्फ महिलाओं को ही प्रिय नहीं होता, नागाओं को भी सजना-संवरना अच्छा लगता है। ऐसा कहा जाता है कि नारी के लिए 16 सिंगार है, लेकिन नागाओं के 17। फर्क इतना है कि नागाओं की श्रंगार सामग्री, महिलाओं के सौंदर्य प्रसाधनों से बिलकुल अलग होती है। उन्हें भी अपने लुक और अपनी स्टाइल की उतनी ही फिक्र होती है जितनी आम आदमी को।
इलाहबाद कुंभ में ऐसे कई साधु-नागा बाबा देखने को मिल रहे हैं जो अपने विशेष श्रंगार के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। नागा साधु प्रेमानंद गिरि के मुताबिक नागाओं में भी अपने विशेष श्रंगार साधन हैं। ये आम दुनिया से अलग हैं लेकिन नागाओं को प्रिय होते हैं। आइए हम आपको बताते हैं कि नागा साधु कैसे-कैसे अपना सिंगार करते हैं।