शैवों को क्यों कहा जाता है दशनामी संन्यासी?

शैव अखाड़ों के आगे दशनामी शब्द लगाया जाता है। कई लोग इसका अर्थ शैवों के दस अखाड़ों से लगाते हैं। दस अखाड़े मतलब दशनामी। लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। दशनामी का अर्थ दस नामों से है।
शैव सन्यासियों के नाम में ये नाम शामिल होते हैं। शैव साधु अपने नाम के साथ इन नामों को लगाते हैं जिससे उनके पंथ, मठ और परंपरा की पहचान हो सके। ये नाम उनके नाम में शामिल होते है। जैसे हम अपने नाम से सरनेम का उपयोग करते हैं, वैसे ही संन्यासियों में इन दस नामों का उपयोग किया जाता है। ये दस नाम हैं सरस्वती, तीर्थ, अरण्य, भारती, आश्रम, गिरि, पर्वत, सागर, वन, और पुरी। जैसे महामंडलेश्वर सत्यमित्रानंद गिरि, महामंडलेश्वर परमानंद सरस्वती।
इन नामों से पता लगाया जा सकता है कि कौन सा संत किस शंकराचार्य मठ के अधीन है।
किस नाम के संन्यासियों के लिए कौन सा शंकराचार्य मठ....
सरस्वती, तीर्थ, अरण्य, भारती - श्रंगेरि मठ (कांचीपुरम्/रामेश्वरम्)
तीर्थ, आश्रम - शारदा पीठ (द्वारिका)
गिरि, पर्वत, सागर - ज्योतिर्मठ (बद्रीक आश्रम, उत्तराखंड)
वन, पुरी, अरण्य - गोवर्धनपुरी मठ (जगन्नाथ पुरी)







