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Home >> Uttar Pradesh >> Lucknow >> Ashis Nandy And Namwar Singh Is Not Happy With Democracy Says Kanwal Bharti

'लोकतंत्र से खि‍सि‍याए हैं आशीष नंदी और नामवर सिंह'

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लखनऊ. लेखक आशीष नंदी के बयान के बाद जाति पर हो रही बहस में एक बार फि‍र से गर्मी आ गई है। इसी संदर्भ में उत्‍तर प्रदेश के साहि‍त्‍यकारों, दलि‍त चिंतकों के बयान महत्‍वपूर्ण है। दैनि‍क भास्‍कर.कॉम की टीम उत्‍तर प्रदेश के प्रमुख साहि‍त्‍यकारों और दलि‍त चिंतकों के नजरि‍ये से रूबरू करा रही है- 
 
'लोकतंत्र से खि‍सि‍याए हैं नंदी और नामवर:कंवल भारती 
"अभी न्यूज़ चैनल पर देखा कि जयपुर पुस्तक महोत्सव में लेखक और समाजशास्त्री आशीष नंदी ने फरमाया है कि सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार दलित वर्गों यानी अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ी जातियों के लोग करते हैं। आशीष नंदी अगर सिर्फ लेखक होते तो उन्हें नामवर सिंह की श्रेणी में रखकर उनपर तरस खाया जा सकता था, क्योंकि वे भी दलित-विरोधी मानसिकता के हैं। फर्क सिर्फ यही है कि जहां नामवर सिंह को यह चिंता है कि दलितों को आरक्षण जारी रहा तो ब्राह्मण-ठाकुरों के लड़के भीख मांगेगे, वहीं आशीष नंदी दलितों को ही भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेदार मानते हैं। 
 
ये दोनों एक ही मानसिकता के हैं कि दलितों को भागीदारी अर्थात आरक्षण के तहत नौकरी न मिले। नौकरी मिली तो नामवर सिंह के मुताबिक़ ब्राह्मण-ठाकुरों के लड़के वि‍श्‍ववि‍द्यालयों में प्रोफेसर नहीं बन पाएंगे और नंदी के मुताबिक़ भ्रष्टाचार करेंगे। लेखक को लोकतान्त्रिक और प्रगतिशील होना चाहिए और ये दोनों ही लोकतान्त्रिक और प्रगतिशील नहीं हैं। ये लोकतंत्र से खिसियाये लोग हैं, इसलिए इनके लिए क्या रोना।
 
लेकिन आशीष नंदी को क्षमा नहीं किया जा सकता, क्योंकि वे समाजशास्त्री भी हैं। ऐसा कोई भी समाजशास्त्रीय अध्ययन, जो किसी अपराध के लिए जातिविशेष या धर्मविशेष को दोषी मानता हो, तथ्यात्मक और वैज्ञानिक अध्ययन नहीं हो सकता। ऐसा अध्ययन करने वाला किसी भी तरह से समाजशास्त्री नहीं हो सकता। और यदि वो है तो पागल है और उसे शिक्षण-कार्य से तुरंत रोक दिया जाना चाहिए। इन नीम-हकीम समाजशास्त्री को मालूम होना चाहिए कि ब्रिटिश सरकार ने कुछ घुमंतू जनजातियों को अपराधशील जातियों के रूप में नोटिफाइड किया था, जो गलत था, क्योंकि इसी आधार पर उन पर पुलिस अत्याचार करती थी। (जारी..)
 
 
फाइल फोटो- जयपुर साहि‍त्‍य समारोह में बोलते आशीष नंदी।  
 
स्‍लाइड में पढ़ें डा.काशीनाथ सिंह, कंवल भारती, महाकवि गोपाल दास नीरज और दुसाध हरि‍ लाल के बयान.. 
 
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