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यूपी में हज यात्रियों की सूची में घोटाला
भास्कर न्यूज
| Jul 10, 2012, 11:07AM IST

धोखाधड़ी से मुख्य फेहरिस्त में अपना नाम शामिल कराया है। इतना ही नहीं 18 हज यात्री ऐसे हैं जिनके बारे में न कोई विवरण है और न ही उन लोगों ने हज यात्रा के लिए आवेदन किया था। गड़बड़ियों को उजागर करते हुए आजम ने कहा गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी।
आजम खां की पहल पर पुलिस ने इस मामले में तुरंत एक्शन लेते हुए हजरतगंज कोतवाली में न सिर्फ 170 फर्जी हज यात्रियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज किया है, बल्कि 27
यात्रियों के पासपोर्ट भी जब्त कर लिए गए। हज अधिकारी तनवीर अहमद सिद्दीकी की तहरीर पर कोतवाली हजरतगंज में एफआईआर दर्ज की गई है। आरोपियों के खिलाफ जालसाजी व आइटी एक्ट के तहत धाराएं लगाई गई हैं।
खां ने आशंका जताई है कि धोखाधड़ी कर हज पर जाने वालों में और लोग भी हो सकते है। उन्होंने दावा किया कि इस धांधली में मुंबई और दिल्ली की कई एजेंसियां भी शामिल हैं। आजम खान के अनुसार राज्य हज कमेटी के कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना यह धोखाधड़ी हो ही नहीं सकती। उन्होंने कहा कि मामले की गहराई से जांच कराई जा रही है और दोषी लोगों को कतई बख्शा नहीं जाएगा।
खां ने बताया कि इस फर्जीवाड़े के बारे में तब पता चला जब 30 जून को मेरठ के एक आवेदक लखनऊ हज कमेटी के दफ्तर में अपना पासपोर्ट जमा करने आए। उनका नाम सिस्टम की सूची से गायब था। बाद में कुछ पासपोर्ट डाक से भी पहुंचे। जिनका नाम प्रतीक्षा सूची में नहीं था।
इसकी जानकारी राज्य हज कमेटी से सचिव को देकर जांच शुरू कराई गई तो 170 नाम सामने आए जिन्हें अलग-अलग आईपी एड्रेस से सूची में डाल दिया गया था। यह बदलाव सिर्फ यहीं नहीं किया गया, बल्कि सेंट्रल हज कमेटी सर्वर पर भी डाल दिया गया है।
सब्सिडी पर क्या कहा था सुप्रीम कोर्ट ने
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए थे कि हज सब्सिडी को धीरे-धीरे कम करते हुए अगले 10 साल में पूरी तरह हटा दिया जाए। कोर्ट ने आदेश दिया था कि बतौर हज सब्सिडी दी जाने वाली राशि का समुदाय के कल्याण के लिए इस्तेमाल किया जाए।
सूची में गड़बड़ी के लिए हैक की गई वेबसाइट
हज यात्रियों की सूची में जिस तरह गड़बड़ी की गई उससे दूसरे राज्यों में भी घोटाले की संभावना व्यक्त की जा रही है। पूरा खेल हाईटेक था। हज पर भेजने के लिए घोटालेबाजों ने हज कमेटी की वेबसाइट ही हैक कर ली। जिस आइपी एड्रेस के जरिए साइट को हैक कर नाम बदले गए हैं, उसे ढूंढ लिया गया है।
वेटिंग लिस्ट में 16 आइपी एड्रेस के जरिए नाम बदले गए हैं और हज पर जाने के लिए चुने गए नामों की सूची में हेरफेर करने के लिए एक ही आइपी एड्रेस का इस्तेमाल हुआ है। जिन आईपी एड्रेस का इस्तेमाल किया गया है उनमें लखनऊ के साथ अधिकतर आइपी एड्रेस मुंबई व बेंगलूर के हैं।
एसएसपी आशुतोष पांडेय ने बताया है कि हज कमेटी ऑफ इंडिया ने सुपरवाइजर के लिए अलग और ग्रुप इंचार्ज के लिए अलग पासवर्ड व यूजर नेम दिए थे। इसके अलावा अभिषेक कंप्यूटर व रायज थिंक टैंक कंप्यूटर से भी डेटा इंट्री का कार्य किया जा रहा था। 25 अप्रैल तक डेटा इंट्री होनी थी जबकि 10 जुलाई तक इसमें संशोधन किया जा सकता था। इसी बीच 17 मई से 29 जून के बीच यात्रियों के नामों को बदल दिया गया। उन्होंने बताया कि पुलिस ने 170 यात्रियों को चिह्न्ति कर लिया है। उन लोगों के बारे में छानबीन की जा रही है, जिनके पास पासवर्ड थे और उन्होंने डाटा इंट्री में यह हेराफेरी की।
जिन 27 लोगों के पासपोर्ट कब्जे में लिए गए हैं, उनसे भी पूछताछ की जाएगी ताकि पता लग सके कि उन्होंने किससे संपर्क कर अपने नाम दर्ज करवाए थे। जांच में जिन आरोपियों के नाम सामने आएंगे उन्हें नामजद कर आगे की कार्रवाई होगी। उप्र सरकार ने इस साल हज यात्रियों का कोटा बढ़वाने के लिए काफी मेहनत की थी।
इस बारे में उप्र के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा था। 2011 में 32,532 हज यात्री उत्तर प्रदेश से हज यात्रा पर गए थे। इस वर्ष हज कमेटी ऑफ इंडिया ने 25,359 हज यात्रियों का कोटा उत्तर प्रदेश को आवंटित किया है। इसके बाद 1 जून को 4,029 हज यात्रियों का कोटा बढ़ा दिया गया, जिनकी कुल संख्या 29,388 हुई है, जो कि गत वर्ष की संख्या 32,532 की तुलना में 3,144 कम है।
मुख्यमंत्री ने हज यात्रियों की संख्या 32,532 करने की मांग की थी। मंत्री आजम खान ने भी अध्यक्ष हज कमेटी ऑफ इंडिया की अध्यक्ष मोहसिना किदवई को 7 मई को लिखे पत्र में उत्तर प्रदेश से हज यात्रियों की संख्या में वृद्धि करते हुए उसे कम से कम गत वर्ष की भांति 32,532 किए जाने का अनुरोध किया था।






