लेकिन मौनी अमावस्या पर मौनव्रत धारण कर स्नान करने से तन-मन,इन्द्रियां और वाणी सभी शुद्ध होते हैं।हलाकि मौन व्रत का मतलब केवल वाणी का मौन नहीं, मनसा-वाचा-कर्मणा का मौन है यानी इस दिन वाणी के मौन के साथ मन भी विचारशील न हो इसके अलावा कोई शारीरिक चेष्टा भी न की जाए तो मौनी अमावस्या का संकल्प पूरा होता है।
शाही स्नान के लिए संगम तट पर पहुंचे महानिर्वाणी अखाड़ा के नागा साधु।