इलाहाबाद. भूमि-पूजन और धर्मध्वजा की स्थापना के बाद से ही प्रयाग की त्रिवेणी में साधुओं की आमद शुरू हो गयी थी। मंगलवार को वो घड़ी भी आ गयी, जिसका इंतज़ार संगम में रहने वाले और पूरी दुनिया को बड़ी बेसब्री से रहता है, क्योंकि ये ही वह दिन होता है जब भक्तों को अपने उन गुरुओं के दर्शन की मुहमांगी मुराद मिलती है जो आम दिनों में सहज नहीं होता।