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मतदान करने से पहले जानें अपने मत की ताकत!

 
Source: एजेंसी   |   Last Updated 09:37(02/02/12)
 
 
 
 
कानपुर। यदि प्रत्याशी पसंद न आए तो 17(ए) रजिस्टर का प्रयोग करें, जो कि पीठासीन अधिकारी के पास रखा रहता है। इसपर वोट न डालने का कारण लिखकर हस्ताक्षर कर दें, जिसे सत्यापित करके पीठासीन अधिकारी सुरक्षित रखेगा। इस कार्रवाई का चुनाव आयोग संज्ञान नहीं लेता है।

यदि बड़ी संख्या में वोट न पड़े और नाराजगी जताई जाए तो आयोग आगे की कार्रवाई कर सकता है। वहीं, जिन मतदाताओं का वोट फर्जी तरीके से पड़ जाए, वह टेंडर वोट डाल सकते हैं। इसका प्रावधान 17(बी) में है। टेंडर वोट मतगणना स्थल पर रहता है। यदि जीत-हार का अंतर कम रहता है और उतने टेंडर वोट पड़े होते हैं तो लिफाफा खुलता है। उनकी गणना होती है। यदि जीत-हार का अंतर ज्यादा रहता है तो टेंडर वोट नहीं गिने जाते हैं।
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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