अमरमणि ने ही करवाया मधुमिता का मर्डर, हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखी उम्रकैद की सजा

नैनीताल: यूपी के चर्चित मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में नैनीताल हाईकोर्ट ने मुख्य आरोपी अमरमणि त्रिपाठी और उसकी पत्नी मधुमणि त्रिपाठी को निचली अदालत द्वारा दी गई आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है।
गौरतलब है कि साल 2007 में देहरादून की अदालत ने समाजवादी पार्टी के तत्कालीन विधायक अमरमणि त्रिपाठी, पत्नी मधुमती त्रिपाठी, भतीजे रोहित चतुर्वेदी और एक अन्य अभियुक्त को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। वहीं अदालत ने प्रकाश चंद्र पांडे नाम के अभियुक्त को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया था लेकिन अब नैनीताल हाईकोर्ट ने इस अभियुक्त को भी उम्रकैद की सजा सुना दी है।
मधुमिता हत्याकांड में पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी, उनकी पत्नी समेत अन्य आरोपी फिलहाल आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। उन्होंने सीबीआई देहरादून की कोर्ट के आजीवन कारावास के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
दूसरी तरफ हत्याकांड की मुख्य वादी मधुमिता की बहन निधि शुक्ला ने मुख्य अभियुक्त पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी पर सपरिवार जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। इससे तंग आकर उसने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु की मांग की है।
गौरतलब है कि यह मामला सन 2003 का है। कवियत्री मधुमिता शुक्ला का कत्ल 9 मई को लखनऊ की पेपर कालोनी में किया गया था। कत्ल के वक्त मधुमिता गर्भवती थी। मधुमिता के परिवार वाले दावा किये थे कि बच्चा तत्कालीन मंत्री अमरमणि का है। अमरमणि का नाम आने पर माया सरकार ने उनको मंत्रीमंणल से बर्खास्त कर दिया था, और जाचं सीबीआई के पास भेज दी थी। बताते चलें कि मधुमिता एक तेजतर्रा कवि थी। उस समय यूपी के मंत्री अमरमणि से उनका प्यार परवान चढ़ गया। दोनों गुपचुप मिलने लगे। यह बात मंत्री की पत्नी को रास नहीं आई। उनकी पत्नी और अमरमणि पर मधुमिता की हत्या 2003 में कराने का आरोप है। फिलहाल, अमरमणि जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।







