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पढ़ने लि‍खने में बहुत तेज थी दामि‍नी

आशीष राय | Dec 29, 2012, 19:00PM IST
पढ़ने लि‍खने में बहुत तेज थी दामि‍नी
लखनऊ. सिंगापुर में जिंदगी की जंग हार चुकी दामि‍नी का गांव आज स्‍वयं को परास्‍त महसूस कर रहा है। गांव में मातम का माहौल है और चौपालों पर होने वाली चर्चाओं में लोग दुख व्‍यक्‍त कर रहे हैं। बलिया के इस गांव में तो पहले भी दुख के बादल छाए थे जो आज शनि‍वार को दामि‍नी की मौत की खबर आने के बाद बरस पड़े। 
 
बलि‍या स्‍थि‍त दामि‍नी के गांव में शनि‍वार को कई घरों में चूल्हे भी नहीं जले हैं। हालांकि‍ पीड़ित के सभी परिजन इस समय दिल्ली में ही हैं, लेकिन गांव वालों को उम्मीद है कि‍ अंतिम संस्कार के लिए लड़की का पार्थिव शरीर बलिया उस के पैतृक गांव में लाया जाएगा।
 
इस घटना ने पूरे गांव को इस कदर झकझोर कर रख दिया है। गांव के लोगों का कहना है कि जिनकी बेटियां बाहर पढ़ती हैं, वो अब सोचने को मजबूर हो गए हैं कि‍ जब देश की राजधानी में ही उनकी बेटी सुरक्षित नहीं है तो अब लोग क्या करें। जबसे यह घटना घटी है, पूरे गांव ने सुबह शाम गांव के बीचों-बीच बने शिवालय में मासूम की जिंदगी के लिए दिये जला रहे हैं। गांव वालों ने उसकी लंबी उम्र के लिए प्रार्थना की, लेकिन उनके इन प्रयासों के बावजूद लड़की ज़िंदगी की जंग हार गई। उसकी मृत्यु की सूचना जैसे ही गांव में आई, पूरे गांव में मातम छा गया है।
 

ग़ौरतलब है कि‍ लड़की का पूरा परिवार आज से करीब 25 साल पहले इस गांव से चला गया था। गांव के कुछ बुजुर्ग बताते हैं कि‍ लड़की जब भी कभी गांव आया करती थी, वह ज्यादा घर से बाहर नहीं निकलती थी। वह पढ़ने लिखने में काफी तेज़ थी। यही कारण है कि‍ उसके पिता उसे बाहर पढ़ा रहे थे। रेप पीड़ित को अब इंसाफ दिलाने के लिए गांव वालों के दिलों में आक्रोश की लहर साफ़ देखने को मिल रही है। उनका कहना है कि‍ ऐसे दरिंदों को फांसी देनी चाहिए।

 

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