लखनऊ. कांग्रेस की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और विधायक डा. रीता बहुगुणा जोशी के घर हुई आगजनी मामले में सीजेएम द्वारा दिया गया एफआईआर दर्ज करने का आदेश कोर्ट से तो निकला लेकिन थाने नहीं पहुंचा। समय बीतता गया और धीरे-धीरे मामला दबता चला गया। लेकिन तीन महीने बाद अचानक इंस्पेक्टर हुसैनगंज को इस आदेश की भनक लग गई, उन्होंने खुद अदालत से आदेश की नकल निकलवाई और बसपा के पूर्व विधायक जितेन्द्र सिंह बबलू, पूर्व राज्यमंत्री इंतिजार आब्दी बॉबी पर तत्कालीन एसपी ईस्ट हरीश कुमार, सीओ हजरतगंज वीएस गरब्याल और इंस्पेक्टर हुसैनगंज बीआर सरोज की मिलीभगत और उकसाने पर आगजनी, बलवा और तोडफ़ोड़ की एफआईआर दर्ज कराई है।
यूपी कांग्रेस कमेटी के पूर्व महामंत्री और नई दिल्ली के नगला राय निवासी राजवीर सिंह ने 21 जुलाई 2009 को सीजीएम कोर्ट में एफआईआर दर्ज करने की मांग की याचिका दाखिल की थी। याचिका में कहा गया कि वह महामंत्री होने के कारण अक्सर लखनऊ आते-जाते थे। 15 जुलाई 2009 को उनकी अम्बेसडर कार (डीएल 4सी/एई 0111) प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रीता बहुगुणा जोशी के बंगले में खड़ी थी।
इसी दौरान रात करीब 11.30 बजे बीकापुर से तत्कालीन विधायक जितेन्द्र सिंह बबलू, पूर्व राज्यमंत्री इंतिजार आब्दी बॉबी, एसपी ईस्ट हरीश कुमार, सीओ हजरतगंज वीएस गबरियाल, इंस्पेक्टर हुसैनगंज बीआर सरोज मुंह में कपड़ा बांधे कुछ अज्ञात लोगों के साथ आ पहुंचे और बंगले के बाहर स्ट्रीट लाइट के नीचे एक साथ खड़े होकर बातचीत करने लगे। तभी एसपी ईस्ट हरीश कुमार ने उन लोगों से कहा कि एसएसपी और डीआईजी भी आ गये हैं, अब आप लोग अपना काम बिना डर के कर सकते हैं।