यूपी के सीएम ने मंत्रियों के लिए खींची आचार संहिता की लक्ष्मण रेखा
लखनऊ . यूपी, सपा और बहुमत की सरकार की छवि बचाने के लिए सीएम अखिलेश यादव ने आचार संहिता की लक्ष्मण रेखा खींच दी है। सीएम ने अपने सहयोगी मंत्रियों पर मंहगें उपहार लेने व सार्वजनिक समारोहों में सोने चांदी के ताज पहनने पर रोक लगा दी है। यह पहला मौका है जब उप्र के सीएम ने सरकार बनने के बाद अपने सहयोगियों को ‘लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951’ की याद दिलाई है। यह अपेक्षा की है कि सभी मंत्री अधिनियम के प्रावधानों का कड़ाई से पालन करें। इसके लिए उन्होने मंत्रियों को पत्र भेजा है। जिसमें कहा गया है कि अनुकूल अचारण न होने पर मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
सीएम अखिलेश यादव ने शपथ लेने के बाद अपनी व पत्नी डिंपल की संपत्ति सार्वजनिक कर दी थी। उनके इस कदम का स्वागत हुआ पर मंत्रिमंडलीय सहयोगियों ने इसका पालन नही किया। एक दो मंत्रियों ने ही अपनी संपत्ति की घोषणा की है। मंत्रियों के आचारण को संतुलित बनाये रखने के लिए अखिलेश यादव ने सरकार के 100 दिन पूरे होने के बाद मंत्रियों को आचार संहिता का तोहफा दिया है। मंत्रियों को अपनी व परिवार के सभी सदस्यों की संपत्ति घोषित करने का निर्देश दिया है।
यह घोषणा हर साल 31 मार्च के पहले करनी होगी। इसके साथ सरकारी सहयोगी से पांच हजार से अधिक का उपहार लेने पर स त पाबंदी लगा दी है। इतना ही नही पांच हजार से कम मूल्य के उपहार मंत्री को अपने पास रखने की छूट होगी। लेकिन इससे अधिक मूल्य के मिले उपहार को सरकार के खजाने में जमा करना होगा यदि मंत्री ऐसे उपहार को रखना चाहेगा तो उसे उसका मूल्य खजाने में जमा करना होगा। सीएम ने अपने निर्देश में मंत्रियों से कहा है कि सार्वजनिक समारोहों में थैली भेंट लेने, सोने चांदी के मुकुट जैसे सामंती प्रतीकों को स्वीकार नही करना है। मंत्रियों को आडंबर पूर्ण खर्चीले समारोहों से दूर रहने की सलाह देते हुए कहा है कि सरकारी दौरे में मंत्री को सरकारी डाक बंगले या अतिथिगृह में ठहरना चाहिए। होटल या किसी के निजी आवास में ठहरने से बचें। सीएम ने मंत्रियों पर राजनीतिक चंदे लेने पर भी रोक लगाई है।
अपने पत्र में सीएम ने मंत्रियों से कहा है कि वे किसी भी तरह के ऐसे काम से बचें जिससे सरकार की बदनामी हो सकती हो। ऐसी कोशिश करें जिससे व्यवस्था पारदर्शी नजर आए। इसके भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगेगा। वे अपने लिए उपहारों से भी परहेज करें। विशेष तौर पर सामाजिक समारोहों में दिए जाने वाले महंगे स्मृति चिह्नें से। यदि कोई उपहार पांच हजार से अधिक का है तो उसे सरकार की संपत्ति माना जाएगा। मंत्री खुद को कोटा, परमिट लाइसेंस से भी अलग रखेगें तो ईमानदारी का अच्छा संदेश जाएगा। सिर्फ मंत्री ही नहीं, उनके परिवारी जन को भी उपहार लेने से प्रतिबंधित किया गया है। यदि कोई संस्था उनका सम्मान करना चाहती है तो पहले इस संस्था के बारे में पूरी जानकारी इकट्ठा कर लें। इस बारे में किसी भी तरह की शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी और खुद सीएम कड़े कदम उठाएंगे।








