कौन होगा यूपी के सिंहासन का दावेदार!
Source: एजेंसी | Last Updated 14:08(06/02/12)
लखनऊ। यूपी में आठ फरवरी को विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान होना है और असली लड़ाई बसपा, सपा, कांग्रेस और भाजपा के बीच है। जनता अपना फैसला किसके पक्ष में सुनाती है यह तो वक्त ही बताएगा, पर कांग्रेस जो पिछले 22 वर्षो से यूपी में वनवास काट रही है। उसे उम्मीद है कि इस बार उसका यह वनवास खत्म हो जाएगा। वहीं भाजपा का कहना है कि सत्ता की चाभी उसके पास ही होगी।
वनवास खत्म होने की उम्मीद
कांग्रेस राजनीति में मंडल और मंदिर मुद्दे छाने के बाद 1989 से इस राज्य की सत्ता से दूर है। छह दिसम्बर, 1992 को बाबरी मस्जिद ढहने के बाद से यूपी में कांग्रेस के सितारे गर्दिश में हैं।
भविष्य के प्रधानमंत्री के रूप में पेश किए जा रहे राहुल गांधी 2009 में हुए पिछले लोकसभा चुनावों से ही मिशन यूपी-2012 में लगे हुए हैं। राज्य की 80 लोस सीटों में कांग्रेस ने 22 सीटें जीती थीं। इस सफलता ने पार्टी के अंदर नई जान फूंक दी।
कांग्रेसी नेताओं का दावा है कि राहुल यूपी की परीक्षा में शानदार सफलता हासिल करने वाले हैं। कांग्रेस के नेता राशिद अल्वी का मानना है कि यूपी की जनता पिछले 22 सालों से गैर कांग्रेसी सरकारों से थक चुकी है। यही वजह है कि राज्य आश्चर्यजनक नतीजे दे सकता है।
भाजपा के पास होगी सत्ता की चाभी
अयोध्या मुद्दा मंद पड़ने के बाद भाजपा यूपी में करीब 10 साल से सत्ता से बाहर है। पिछले 2007 विस चुनावों में यह पार्टी केवल 50 सीटें जीत सकी।
भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर का दावा है कि यूपी में अगली सरकार बनाने की चाबी भाजपा के हाथ में होगी। भाजपा में अंदरुनी कलह की खबरों के बीच जावडेकर ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने यूपी में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। उन्होंने उमा भारती के संदर्भ में कहा कि गडकरी ने पार्टी से बाहर गए नेताओं को वापस बुलाने की भी पहल की।
सपा के नेता मोहन सिंह ने इस बातों को खारिज किया कि कांग्रेस या भाजपा राज्य में मजबूती हासिल कर रही हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और भाजपा यूपी में दर्शक दीर्घा के दर्शक हैं, जबकि सपा और भाजपा प्रमुख खिलाड़ी हैं। मोहन सिंह ने दावा किया कि कांग्रेस और भाजपा के बीच तीसरे स्थान की लड़ाई है।