इस घर में बना ऐसा बम जिसने कर दिया था अंग्रेजी हुकूमत की नाक में दम

आगरा। भगत सिंह ने अंग्रेजी हुकूमत हिलाने के लिए आगरा में बम बनाने की अस्थाई फैक्ट्री लगाई थी। यहां के हींग की मंडी इलाके में था। इसकी प्लानिंग भगत सिंह ने नूरी दरवाजा में की थी। यह मकान बेहद जर्जर हालत में आज भी मौजूद है। सरकार ने मकान को दुरुस्त करने की सुध नहीं ली है। यहां अभी कुछ किराएदार रह रहे हैं। भगत सिंह ने इसी मकान में प्लान बनाया और दिल्ली स्थित असेंबली में बम फोड़ दिया। अंग्रेज पुलिस अधिकारी जेपी सांडर्स को लाहौर में गोली मारने के बाद भगत सिंह आगरा आ गए थे।
नवम्बर 1928 में लाला छन्नो मल के इस मकान में कई दोस्तों के साथ मकान नंबर 1784 को किराए पर लिया। वह यहां छात्र बनकर रहे और इसके लिए उन्होंने आगरा कॉलेज में दाखिला भी लिया था। यहां बनने वाले बम की टेस्टिंग नालबंद नाला या नूरी दवाजाके पीछे जंगल में होती थी। क्रांतिकारियों का कुछ सदस्य नाई की मंडी में भी रुके थे। यहां बम और हथियार छिपाकर रखे जाते थे। भगत सिंह से जुड़े दस्तावेजों के मुताबिक अंग्रेजों ने ट्रेड्स डिस्पयूट्स बिल को दिल्ली स्थित असेंबली में पेश किया था।
भगत सिंह और अन्य क्रांतिकारियों ने इसी मकान में मीटिंग कर असेंबली में बम फेंकने की तैयारी की। भगत सिंह ने इस काम के साथी के रुप में एक अन्य युवक को चुना था। इसमें राजगुरु का नाम नहीं था। लेकिन राजगुरु के दबाव में उन्हें साथ ले जाना पड़ा।
चिन्तामणि की किताब में क्रांतिकारियों की गतिविधियों का विवरण मिलता है। इसी घर में राजगुरु ने उचंग में आकर संड़सी से अपने शरीर को जलाकर टार्चर सहने की क्षमता को आंका था। सांडर्स मर्डर केस में गवाही के दौरान छन्नो ने स्वीकारा था कि उसने पांच रुपए मासिक दर पर भगत सिंह को कमरा दिया था। उन्हें ढाई रुपए पेशगी मिली थी। घासी राम और बेनी प्रसाद ने कहा कि युवक उनकी दुकान पर दूध पीने व अन्य जरूरी चीजें खरीदने आते थे।
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