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पानी में बह गया बुंदेलखण्ड पैकेज का पैसा

 
 
 
Source: भास्कर न्यूज   |   Last Updated 12:42(19/01/12)
 
 
 
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झांसी। बुंदेलखण्ड के झांसी जिले के पथराई बांध से दो नहरें बनाने का काम जब शुरू हुआ था तो किसानों के चेहरे इस उम्मीद से खिल उठे थे कि चलो अब उन्हें सिंचाई के लिए न केवल भरपूर पानी मिलेगा बल्कि फसलें सूखने की बजाए लहलहाएंगी।

..मगर ऐसा हो न सका। उनकी यह उम्मीद ज्यादा दिन तक कायम न रह सकी और अब वह उम्मीद तार-तार हो चली है, क्योंकि इन नहरों में पानी ठहर ही नहीं पा रहा है। नहर का तो आलम यह है कि बांध से पानी आते ही वह चार बार टूट चुकी है।

सूखे के कारण देश में चर्चित बुंदेलखण्ड की तस्वीर बदलने के लिए केंद्र सरकार ने 7266 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज दिया है। इस राशि से मध्य प्रदेश के छह जिलों और उत्तर प्रदेश के सात जिलों में विकास की गंगा बहाई जानी है, लेकिन इस पैकेज का हाल क्या है, यह बताने के लिए पथराई बांध से निकली नहरें काफी हैं।

झांसी जिला मुख्यालय से लगभग 70 किलोमीटर दूर स्थित टोडी फतेहपुर इलाके में पथराई बांध से दो नहर निकली हैं ताकि साढ़े पांच हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो सके। दाई नहर की लम्बाई जहां 12 किलोमीटर है, वहीं बाई नहर नौ किलोमीटर लम्बी है। बाई नहर की हालत देखते ही पैकेज से चल रहे काम की हकीकत बयां हो जाती है।

सिजवा गांव का खेतिहर किसान दशरथ कुशवाहा तब बहुत खुश हुआ था, जब बाई नहर का काम शुरू हुआ था। यह बाई नहर उस खेत के करीब से निकली है, जो उसने ठेके पर लिया है। नहर नजर तो आने लगी है, मगर पानी कब आएगा उसे पता नहीं है।

दशरथ बताता है कि इस नहर की जांच के दौरान पथराई बांध से चार बार पानी छोड़ा गया और हर बार नहर टूट गई, पानी नहर की टेल तक पहुंच ही नहीं पाया। इस नहर के निर्माण में तकनीकी खामी भी है, बांध की तरफ नहर गहरी व अंत की ओर ऊंची होती जा रही है।

बाई नहर के साइफ के पास टूटी पड़ी नहर निर्माण में हुई गड़बड़ी की हकीकत बयां कर रही है, सीमेंट का उपयोग बहुत कम किया गया है, इतना ही नहीं नहर खुदाई से निकली मिट्टी को किनारे ही जमा कर दिया गया है, जो पहली ही बारिश में नहर में पहुंच जाएगी।

सामाजिक कार्यकर्ता राजेश राय ने बताया, "बाई और दाई नहर का हाल एक जैसा ही है, इतना ही नहीं जो कुएं बनाए गए हैं वे धसक रहे हैं। कई कुओं में तो पानी ही नहीं है। पैकेज का लाभ यहां के लोगों को नहीं मिल पा रहा है। इतना कुछ होने के बाद भी गड़बड़ी करने वालों पर कार्रवाई नहीं हो रही है।

बुंदेलखण्ड के पैकेज में गड़बड़ियां होने का जिक्र कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव राहुल गांधी भी चुनावी सभाओं में कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि पैकेज का सही उपयोग नहीं हुआ है, कुएं के लिए किसानों को मदद नहीं मिल रही है। पशुपालकों को जो बकरियां दी गईं वे बीमार थीं जिससे उनकी मौत हो गई। पैकेज की राशि की लूट चल रही है।

योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया भी इस इलाके का भ्रमण कर निर्माण कार्य में गड़बड़ियों पर नाखुशी जता चुके हैं। इतना ही नहीं उन्होंने राज्य सरकार से कार्रवाई की उम्मीद भी जताई थी।

बुदेलखण्ड पैकेज निगरानी समिति के चेयरमैन भानु सहाय भी मानते हैं कि गड़बड़ियां खूब हो रही हैं, इस पर उनकी नजर है। उनका कहना है कि बुंदेलखण्ड के विकास के लिए इतनी बड़ी राशि आगे कभी नहीं मिलने वाली इसलिए उनकी कोशिश है कि इस राशि का सदुपयोग हो।

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के बुंदेलखण्ड के हिस्से में इस पैकेज में से 3506 करोड़ रुपये की राशि आनी है, इसमें से अभी तक सिर्फ 24 फीसदी अर्थात 850 करोड़ रुपये राशि ही खर्च हो पाई है। इस पैकेज की मियाद 31 मार्च 2012 थी, लिहाजा राशि का उपयोग न हो पाने के कारण इसे एक वर्ष के लिए बढ़ाना पड़ा है।
 
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