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सचान-आरुषि हत्याकांड: सीबीआई की विश्वसनीयत पर उठते सवाल
dainikbhaskar.com
| Oct 03, 2012, 12:06PM IST

उन्होंने कहा कि सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट और चिकित्सा विश्वविद्यालय द्वारा की गई पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और चीफ ज्युडिशियल मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट अलग कैसे आई? जहां सीबीआई इसे आत्महत्या ही बता रही है, वहीं पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और सीजेएम की रिपोर्ट में हत्या की आशंका जताई गई थी।
उन्होंने कहा कि डॉ सचान के शव का पोस्टमार्टम 23 जून 2011 को चिकित्सा विश्र्वविद्यालय (चिविवि) की मॉर्च्युरी में किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार 22 जून को उनकी मौत सुबह दस बजे के आसपास हुई थी। उनके शरीर पर कुल 9 घाव थे। आठ चोट गहरी थीं, ये सभी मृत्यु से पहले की थी और धारदार हथियार से लगीं। एक चोट गर्दन पर मिली, जो मृत्यु के पश्चात (पोस्टमॉर्टम इंजरी) की पाई गई।
सीबीआई की 'साख' पर सवाल
सीबीआई को देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी माना जाता है। किसी भी घटना में तह तक जाने या इंसाफ पाने के लिए उस पर सबसे ज्यादा भरोसा किया जाता है। यही कारण है कि जब भी कोई वारदात या घोटाला होता है तो लोगों की जुबां पर सीबीआई का नाम होता है। पर यूपी के दो सबसे चर्चित और सनसनीखेज मुद्दों पर उसकी नाकामी अब उसके विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़े कर रही है।
सचान और आरुषि हत्याकांड का केस जब सीबीआई को सौंपा गया तो लोगों को आस बंधी कि अपराधी जरूर पकड़े जाएंगे। पर 14 महीने की जांच के बाद डॉ सचान केस में कुछ भी नया सबूत नहीं मिला। सीबीआई ने मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर कहा कि डॉ वाइएस सचान की हत्या के सबूत नहीं मिले हैं। इसी तरह से आरुषि हत्याकांड में भी सीबीआई ने यूपी पुलिस की थ्योरी को गलत साबित किया था, लेकिन नतीजा सिफर रहा।
दबी जुबान से ही सही अक्सर राजनीतिक पार्टियों द्वारा सीबीआई के गलत इस्तेमाल की बात कही जाती रही है। विपक्षी पार्टियों का तो यहां तक कहना है कि यूपीए सरकार उसकी बदौलत चल रही है। उसका भय दिखाकर बहुमत के आंकड़े जुटाए जाते हैं। ऐसे में सीबीआई जैसी बड़ी जांच एजेंसी की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा हो उठता है।
तस्वीरों के जरिए जानिए कि आखिरकार डॉ सचान के साथ क्या हुआ था...






