बलात्कार की इन बढ़ती घटनाओं पर बसपा सुप्रीमो कहती हैं कि मुख्यमंत्री लाचार हैं। जब वह खुद कह रहे हैं कि क्या अब उन्हें पुलिस की वर्दी पहननी पड़ेगी तो इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह कितने लाचार हैं। उधर भाजपा के प्रवक्ता राजेन्द्र तिवारी कहते हैं कि हालात यह है कि केवल महिला उत्पीड़न व बलात्कार के 1533, छेड़खानी के 1669, शीलभंग की 2983 घटनाएं एक साल में दर्ज हुई है, जिनमें 39 नाबालिग इसकी शिकार हुई है। गम्भीर बात यह है कि उत्तर प्रदेश के पुलिस प्रशासन की कार्यशौली आये दिन विवाद का विषय बन रही है। यह चिंता का विषय है। सपा के राजेंद्र चौधरी कहते हैं कि पांच साल के बसपा शासनकाल में महिलाओं के साथ अत्याचार होते रहे। लखनऊ, कानपुर, फैजाबाद, इटावा जैसे शहरो में महिलाओं के साथ दुष्कर्म की घटनाएं घटीं, वहीं बांदा और लखीमपुर, बहराइच के ग्रामीण इलाकों में भी महिलाओं एवं किशोरियों को दरिंदगी का शिकार होना पड़ा। सपा की जब से सरकार बनी हैं, कानून व्यवस्था की स्थिति में नियंत्रण के साथ महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री जी स्वयं इस मामले में बहुत संवेदनशील है। वूमेन पावर लाइन 1090 को पूरे प्रदेश में प्रभावी किया गया है। आदेश दिया गया है कि छेड़खानी, शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न, बलात्कार, दहेज उत्पीड़न व हत्या के अपराधों की शिकायत पर तत्परता से कार्यवाही की जाए।