बलिया. महज चार साल उम्र में दामिनी इतनी साहसी थी कि काला नाग भी उसके सामने टिक नहीं पाया था। पर कई सालों बाद उसी साहसी लड़की को दरिंदों ने अपनी हवस का शिकार बना लिया। 13 दिनों तक बलात्कारियों द्वारा दिए गए गहरे ज़ख्मों से लड़ते-लड़ते आखिरकार 30 दिसंबर को सिंगापुर एक अस्पताल में दामिनी हमेशा के लिए मौत की नींद सो गई। उसकी मौत से परिजनों सहित पूरा गांव स्तब्ध है। किसी को विश्वास नहीं हो रहा कि हमेशा दूसरों का हिम्मत बढ़ाने वाली दामिनी उनके बीच में नहीं है।
दामिनी के अभूतपूर्व साहस की कहानी उसके अपनों और गांव वालों की जुबानी...
फोटो कैप्शन- सभी तस्वीरें दिल्ली गैंगरेप आंदोलन से संबंधित हैं.