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रुपये हड़पने पर पूर्व डीआईजी के खिलाफ एफआईआर

dainikbhaskar.com | Dec 09, 2012, 14:11PM IST
रुपये हड़पने पर पूर्व डीआईजी के खिलाफ एफआईआर
लखनऊ। बसपा सरकार में मंत्रियों विधायकों से अच्छी पहचान का झांसा देकर पूर्व डीआइजी (स्टांप) ने नौकरी लगवाने के नाम पर एक लाख रुपये हड़प लिए। मामले की जांच के बाद पुलिस ने पूर्व डीआइजी और उनके भांजे के खिलाफ बरेली शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पूर्व डीआईजी इस समय लखनऊ में रहते हैं और बरेली पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजने की तैयारी कर रही है। वैसे ये पहला मौका नहीं है, जब कोई वर्दीधारी किसी अपराध में लिप्त रहा हो। यूपी में इस समय 227 पुलिसकर्मी विभिन्न जेलों में बंद हैं, उनके खिलाफ हत्या, डकैती, बलात्कार, लूट जैसे संगीन मुकदमे दर्ज हैं।
 
बरेली में किशोर बाजार, बिहारीपुर के रहने वाले राजकमल सागर ने कोतवाली में रिटायर्ड डीआइजी स्टाम्प एवं निबंधन रामबहादुर शस्त्री और उनके भांजे महेंद्र के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। इस समय पूर्व डीआइजी लखनऊ के इंदिरागनर में अरावली मार्ग पर रहते हैं। राजकमल का आरोप है कि बरेली में तैनाती के दौरान उनकी रामबहादुर शास्त्री से पहचान हुई थी। रिटायर होने के बाद भी वह उनके आवास पर लखनऊ आता-जाता रहा। 
 
इस दौरान रामबहादुर शास्त्री ने उनसे बताया कि उनका कई विधायकों के यहां आना जाना है। बसपा के सुल्तानपुर के विधायक से उनके अच्छे संबंध हैं। यही नहीं तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती से भी उनकी अच्छी मुलाकात है। किसी को नौकरी पर लगवाना हो तो बता देना। वह पूर्व डीआईजी के इस झांसे में आ गए। उन्होंने अपने मित्र के भांजे दिनेश कुमार को पार्क व स्मारक विभाग में नौकरी लगवाने की बात कही। पूर्व डीआईजी ने तीन लाख रुपये मांगे। इसमें से एक लाख रुपए उन्होंने दे दिए। न तो काम हुआ न ही उनके एक लाख रुपए ही पूर्व डीआईजी वापस कर रहे हैं।
 
विडंबना है कि जिस खाकी वर्दी के ऊपर सूबे की सेवा, सुरक्षा और सहयोग की जिम्मेदारी है, उसी वर्दी के 227 नुमाइंदे विभिन्न अपराधों में लिप्त होने के कारण जेलों में बंद हैं। पूर्व डीआईजी इस फेहरिस्‍त में नया नाम हैं। 110 पुलिस कर्मी तो आजीवन कारावास का दंड भुगत रहे हैं, जबकि एक को मृत्युदंड सुनाया गया है। बाकी के विचाराधीन बंदी हैं। प्रदेश के जेल मंत्री रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया के अनुसार कानपुर जिले के कल्याणपुर थाने में हत्या और हत्या के प्रयास समेत विभिन्न मामलों के आरोपी फतेहगढ़ सेंट्रल जेल में बंद सिपाही अमर सिंह को मौत की सजा हो चुकी हैं। वहीं 18 अगस्त से कानपुर नगर कारागार में निरुद्ध डीएसपी अमरजीत सिंह शाही पर दुराचार और धमकी समेत एससी एसटी एक्ट का भी मुकदमा है। 
 
कुछ चर्चित मामलों जैसे लखीमपुर खीरी के निघासन थाने में सोनम के साथ दुराचार और हत्या के आरोप में सिपाही अतीक अहमद बंद हैं, वहीं औरैया के इंजीनियर हत्याकांड में विधायक शेखर तिवारी का मददगार थानेदार होशियार सिंह भी इटावा में उम्रकैद की सजा भुगत रहे हैं। इसी तरह लखनऊ जेल में चार कांस्टेबल, सीतापुर में दो इंस्पेक्टर सहित चार पुलिसकर्मी, लखीमपुर खीरी में एक दरोगा और तीन कांस्टेबल, हरदोई में एक कांस्टेहबल और एक दरोगा, रायबरेली में एक दरोगा और 15 कांस्टेसबल, इटावा में एक दरोगा, दो सिपाही, कानपुर नगर में एक डिप्टी एसपी, सात कांस्टेबल, तीन दरोगा, दो कांस्टेबल, मथुरा में एक पुलिसकर्मी, झांसी में एक कांस्टे‍बल, अलीगढ़ में चार कांस्टेबल, एटा में एक दरोगा, फि‍रोजाबाद में तीन पुलिसकर्मी, आगरा में एक पुलिसकर्मी, केंद्रीय कारागार आगरा में एक दरोगा, 13 कांस्टेबल, बरेली में 6 कांस्टेबल, बरेली सेंट्रल जेल में दो दरोगा तीन कांस्टेबल, शाहजहांपुर में दो कांस्टेबल, बदायूं में चार कांस्टेबल, पीलीभीत में चार कांस्टेबल, मुरादाबाद में दो दरोगा, एक हेडकांस्टेबल, तीन कांस्टेबल, रामपुर में एक दरोगा, चार कांस्टेाबल बंद हैं।
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