ग्राउंड रिपोर्ट : यूपी में अब जनता की अदालत में जज!
Source: विजय मनोहर तिवारी | Last Updated 09:19(10/02/12)
आजमगढ़। दूसरे दौर के मतदान में एक सीट पर सबकी नजर है। खासतौर से जजों व वकीलों की। इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस करुणाकांत मिश्रा आजमगढ़ से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं। सपा-बसपा के मुकाबले की इस सीट पर 12 घंटे जनसंपर्क में जुटे रहे 63 वर्षीय जज साहब कहते हैं, 'लोगों की शिकायत रहती है कि अच्छे लोग राजनीति में नहीं आते। यही सोचकर चुनाव में उतरा। नतीजा जो भी हो।'
लखनऊ और इलाहाबाद में आठ साल जज रहे मिश्रा ने रिटायर होने के बाद इन बड़े शहरों में बसना मंजूर नहीं किया। वे उप्र के सबसे बदहाल, बेतरतीब और बदनाम आजमगढ़ के अपने पैतृक घर में रहने आए। तीन साल से वे अपनी 22 बीघा जमीन पर खेतीबाड़ी और एक दर्जन गायों की सेवा करते देखे गए हैं। उनके परिवार के कई सदस्य आईएएस-आईपीएस अफसर और डॉक्टर-इंजीनियर हैं।
प्रदेश के मुख्य सचिव अनूप मिश्रा उनके भतीजे हैं। यूपीपीसीएल के महानिदेशक शैलजाकांत मिश्रा भाई हैं। सिर्फ विधायक बनना ही मकसद होता तो सपा या बसपा से टिकट मुश्किल नहीं था। लेकिन जातिवादी राजनीति के विरोधी मिश्रा ने कांग्रेस को चुना। वे कहते हैं, 'मायावती का झुकाव दलितों और मुलायम का यादवों की तरफ जगजाहिर है।' कांग्रेस से उनका पारिवारिक नाता है। उनके दादा स्व. ब्रजबिहारी मिश्रा अतरौलिया सीट से ही 1952 और 62 में दो बार चुने गए। संसदीय सचिव भी रहे।
अगर मिश्रा चुनाव जीते तो वे 25 साल से काबिज सपा के दुर्गा यादव को हराने का रिकॉर्ड बनाएंगे। हालांकि जमीनी सच्चाई का अंदाजा उन्हें है। वे मानते हैं कि राजनीति में उन जैसों को जगह बना पाना कानून की धाराओं से ज्यादा जटिल है। उन्हें टिकट मिलना, दूसरे दावेदार कांग्रेसियों को नहीं सुहाया। कांग्रेस के धूल खाते दफ्तर के बाहर बैठे पार्टी पदाधिकारी ने कहा, 'जज साहब माहौल नहीं बना पा रहे। उन्हें मानना चाहिए कि सादगी और सिद्धांतों का जमाना अब नहीं है।'