ग्राउंड रिपोर्ट : रिकॉर्ड के लिए लड़ रहे हैं यूपी के 'बाहुबली' राजा भैया!
Source: शरद गुप्ता | Last Updated 09:13(10/02/12)
कुंडा(प्रतापगढ़)। बहोरिया गांव। जाने के लिए कच्ची पगडंडी। अचानक धूल का एक गुबार उठता है। एक के बाद एक डेढ़ सौ मोटरसाइकिलें। कुछ सवार युवा तो अधिकतर बुजुर्ग। उनके पीछे सात एसयूवी का काफिला। ये हैं यहां के निर्दलीय प्रत्याशी रघुराज प्रताप सिंह। अब खत्म हो गई बेंती और भद्री रियासतों के स्वयंभू राजा। नहीं पहचाना? राजा भैया। चार बार विधायक चुने गए। हर बार निर्दलीय। तीन बार मंत्री बने। पिछली बार नहीं बने, क्योंकि मायावती से उनकी नहीं बनती।
मायावती सरकार ने उनके तालाब से एक कंकाल और एके-56 रायफल निकालने का दावा किया था। संतोष मिश्र नाम के व्यक्ति का जिसे राजा भैया के लोगों ने 2001 में पीट-पीट कर मार डाला था। महज इसलिए क्योंकि उसकी बाइक राजा भैया की कार से टकरा गई थी। उसकी पत्नी विनीता ने 2003 में राजा भैया के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। मायावती ने न सिर्फ उन्हें जेल भेजा बल्कि उनके तालाब का अधिग्रहण भी कर लिया। तालाब क्या है 2500 हेक्टेयर की झील है। फिलहाल सरकार के कब्जे में है। अगर मुलायम सिंह की सरकार बन गई, इस पर फिर राजा भैया का कब्जा होगा।
2002 में भाजपा विधायक पूरन सिंह बुंदेला ने राजा भैया पर जान से मारने की धमकी का आरोप लगाया था। मायावती ने उन्हें रात तीन बजे गिरफ्तार कर जेल भेजा था। वे 26 महीने जेल में रहे। गैंगस्टर एक्ट से लेकर आतंकवाद निरोधक कानून पोटा तक लगा। वे इसे बदले की कार्रवाई बताते हैं। हालांकि 2003 में मुलायम सिंह ने मुख्यमंत्री बनते ही पोटा हटा दिया। उनके खिलाफ ऐसे 48 मुकदमे हैं। 42 साल के राजा मुलायम सिंह के करीबी हैं। सीतापुर और बरेली जैसी जगहों पर सपा उम्मीदवारों के प्रचार के लिए मुलायम के साथ दौरा कर रहे हैं। जाहिर है मुलायम की सरकार बनी तो वे फिर मंत्री बनेंगे। लेकिन खुद निर्दलीय लड़ रहे हैं। वे बताते हैं - मैं किसी पार्टी में शामिल होकर आजादी नहीं खोना चाहता।
उनके एक समर्थक गबड़ू सिंह कहते हैं - 'पिछली बार वे 60 हजार वोटों के अंतर से जीते थे। अबकी बार यह अंतर सवा से डेढ़ लाख के बीच होगा। हम चाहते हैं कि राजा भैया न सिर्फ सबसे बड़ी जीत दर्ज करें बल्कि उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हो। सबसे ज्यादा बार लगातार निर्दलीय जीतने वाले उम्मीदवार के तौर पर।' अभी बतौर निर्दलीय पांच बार जीत का रिकॉर्ड गोरखपुर के हरिशंकर तिवारी का है। लेकिन पिछली बार वे बसपा प्रत्याशी राजेश त्रिपाठी के हाथों परास्त हो गए। माना जाता है कि राजा भैया आतंक की वजह से जीतते हैं। वहां केवल उनका कानून चलता है। सरकार का नहीं। 1996 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने उन्हें 'कुंडा का गुंडा' बताया था। हालांकि दो साल बाद ही उन्होंने उनका समर्थन लेकर उन्हें मंत्री भी बना दिया।
राजा भैया जिस गांव जाते हैं बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे, युवा सभी उमड़ पड़ते हैं। एक बुजुर्ग कहते हैं - 'भैया अबकी सबसे ज्यादा वोटन से जिताऊब'। इस प्रेम की वजह क्या है? हर व्यक्ति एक ही बात दोहराता है - हमें जब जरूरत होती है, वह हमारी मदद करते हैं। अहिबरनपुर गांव के 80 साल के रामबरन यादव कहते हैं - पुलिस और कचहरी जो फैसला देने में दसियों साल लगा देते हैं, उनके यहां मिनटों में मिलता है।'
राजा भैया बताते हैं - इस क्षेत्र के 3.16 लाख मतदाताओं में केवल 6 हजार ही मेरे जैसे ठाकुर हैं। कम से कम मुझ पर जातिवाद का आरोप तो नहीं लग सकता।
समर्थकों ने गढ़े नए-नए नारे
राजा का चुनाव निशान आरी है। समर्थकों ने नारे गढ़े हैं 'चुनाव निशान है आरी। आरी है सब पर भारी।' राजा इसमें जोड़ते हैं - 'कर लो विरोधियों की तेरहवीं की तैयारी।'
आयोग का आतंक
राजा विरोधियों की बजाय चुनाव आयोग से परेशान हैं। हर सभा की वीडियो रिकॉर्डिंग हो रही है। वे अपने लोगों को निर्देश देते हैं - बाइक कम कराओ। फिर बताते हैं- क्या करूं। जिस गांव जाता है वहां से बाइकें और कारें साथ चल देती हैं। आयोग ने 10 गाडिय़ों की इजाजत दी है। मैं 7 लेकर चलता हूं।