नोएडा. यूपी के तीन शहरों लखनऊ, फैजाबाद और वाराणसी में 2007 में हुए सिलसिलेवार धमाकों और उसमें की गई पुलिसिया कार्रवाही की जांच के लिए गठित निमेष आयोग की रिपोर्ट लीक हो गई है। इसे यूपी सरकार पिछले तीन महीने से सार्वजनिक नहीं कर रही थी। इस रिपोर्ट में खालिद मुजाहिद और तारिक़ कासमी की गिरफ्तारी और उनकी आतंकी घटनाओं में संलिप्तता को संदिग्ध बताया गया है। उनको गिरफ्तार करने वाले अधिकारियों की पहचान करने और कानून के मुताबिक कार्रवाई करने की सिफारिश भी की गई है।
दैनिकभास्कर.कॉम के पास मौजूद निमेष आयोग की रिपोर्ट यूपी सरकार और पुलिस व्यवस्था पर कई बड़े सवाल खड़े करती है। इसमें पेश किए गए तथ्य पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था को ही कठघरे में खड़ा करते हैं। कमीशन के सामने आए तथ्यों से यह स्पष्ट है कि कथित आरोपी तारिक कासमी को दिनांक 12 दिसम्बर, 2007 को शंकरपुर चेकपोस्ट थाना रानी की सराय से कुछ व्यक्तियों ने उठाया। उस समय वह अपनी मोटर साइकिल से इजतेमा के लिए जा रहा था। उनमें से दो अन्य व्यक्ति उसकी मोटर साइकिल लेकर चले गए। इसी तरह 16 दिसंबर 2007 को शाम 6.15 बजे कथित आरोपी खालिद मुजाहिद को महतवाना मोहल्ला थाना मड़ियाहूं जिला जौनपुर से टाटा सूमो में सवार व्यक्यितों ने उसे उठा लिया।
रिपोर्ट के मुताबिक, 22 दिसंबर 2007 के पहले के घटनाक्रम में एसटीएफ के अतिरिक्त अन्य पुलिस दल भी शामिल थे। पर कथित आरोपियों खालिद मुजाहिद और तारिक़ कासमी को किन लोगों ने गिरफ्तार किया, यह स्पष्ट नहीं है। पुलिस द्वारा की गई पूरी कार्रवाही संदेह के घेरे में है। इसलिए आयोग ने संबंधित लोगों पर कानूनी कार्रवाही की बात कही है।