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अमर सिंह पर 'मुलायम' हुई सपा सरकार
Ajayendra Rajan
| Nov 02, 2012, 13:12PM IST

जानकारी के मुताबिक, अमर सिंह के खिलाफ मनी लांड्रिंग केस में पुलिस ने शुक्रवार को कानपुर में जिला जज ओपी वर्मा की अदालत में अपनी क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी। याचिकाकर्ता शिवाकांत त्रिपाठी ने बताया कि आज वकीलों के कार्यबहिष्कार की वजह से वह इस रिपोर्ट के खिलाफ अपील नहीं कर सके हैं। वह शनिवार को इसके खिलाफ अपील करेंगे।
उधर, अमर सिंह मामले में सपा सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता ने कहा है कि सरकार किसी भी मामले में निष्पक्ष जांच की पक्षधर है। पिछली सरकार के दौरान मामले में जांच ठीक से नहीं हो सकी थी, इसी कारण ईओडब्ल्यू से जांच कानपुर के बाबूपुरवा थाने की पुलिस को ट्रांसफर किया गया। उन्होंने अमर सिंह और मुलायम सिंह के बीच किसी भी प्रकार की बढ़ती नजदीकियों से इनकार किया।
बताते चलें कि 15 अक्टूबर 2009 को कानपुर के बाबू पुरवा थाने में शिवाकांत त्रिपाठी की शिकायत पर अमर सिंह के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज कराई गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि मुलायम सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में उत्तर प्रदेश विकास परिषद के अध्यक्ष के तौर पर अमर सिंह ने कई वित्तीय अनियमितताएं कीं। शिवाकांत त्रिपाठी ने मामले में करीब 15 किलो के कागजात भी सबूत की तरह पेश किए, जिनमें बताया गया कि अमर सिंह ने कोलकाता, दिल्ली और कई अन्य जगहों के फर्जी पतों वाली कंपनियों से मनी लांड्रिंग की।
तमाम छोटी-छोटी कंपनियों के सस्ते शेयरों को ऊंचे दामों पर खरीदा गया, फिर फर्जी तरीके से उन्हें बेच दिया गया। चूंकि मामला 25 हजार रुपए से ज्यादा का था, लिहाजा लोकल पुलिस इस संबंध में जांच नहीं कर सकती थी, इसलिए तत्कालीन मायावती सरकार ने मामले की जांच आार्थिक अपराध शाखा को सौंप दी। इसके बाद शिवाकांत त्रिपाठी ने एक याचिका दाखिल कर हाईकोर्ट से आग्रह किया कि पूरी जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से कराई जाए, साथ ही जांच की निगरानी अदालत करे। इस दौरान हाईकोर्ट ने अमर सिंह की गिरफ्तारी पर स्टे दे दिया। साथ ही 20 मई 2011 को ईडी को निर्देश दिया कि मामले की जांच अपने स्तर से करे।
ईडी ने इसी महीने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपनी जांच रिपोर्ट फाइल कर दी। अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में यूपी सरकार ने ईओडब्ल्यू से मामला दोबारा कानपुर की बाबूपुरवा थाने की पुलिस को ट्रांसफर करने का आदेश जारी कर दिया। अब अखिलेश सरकार ने कानपुर पुलिस को निर्देश दिया है कि अदालत में इस संबंध में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करे।
उधर शिकायतकर्ता शिवाकांत त्रिपाठी ने कहा कि यह सही है कि प्रदेश सरकार ने पहले ईओडब्ल्यू से केस की जांच कानपुर पुलिस को सौंपी अब कानपुर पुलिस हफ्ते भर बाद कोर्ट में यह बताने जा रही है कि उसे इस मामले में कोई साक्ष्य नहीं मिले। वह कानपुर पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने का इंतजार कर रहे हैं, जैसे ही वह मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करेगी, वह भी इसके खिलाफ अपील करेंगे। शिवाकांत त्रिपाठी के अनुसार चूंकि यह मामला 25 हजार रुपए से ज्यादा का है, लिहाजा कानपुर पुलिस इस मामले में जांच कर ही नहीं सकती।
सूत्रों के अनुसार पिछले दिनों मौलाना बुखारी के माध्यम से अमर सिंह ने मुलायम सिंह के पास अपनी अर्जी भिजवाई कि उनके खिलाफ मायावती सरकार के दौरान दर्ज किया गया मनी लॉंड्रिंग का मुकदमा वापस ले लिया जाए।








