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मूर्तियों के कारण यूपी में हो सकता है कभी भी बवाल
विजय उपाध्याय
| Jul 29, 2012, 12:20PM IST

शनिवार को आक्रोशित बसपा कार्यकर्ताओं ने करीब चार घटे तक सड़क जाम कर प्रदर्शन किया। पहली घटना शुक्रवार को देर रात मेहनगर क्षेत्र के कटात-चककटात गांव में हुई। जहां लगी अंबेडकर की मूर्ति को तोड़ कर खेत में फेंक दी गई। इसके अलावा नई पलिया तथा जियासठ गावों में स्थित अंबेडकर की मूर्तियों को भी नुकसान पहुंचाया गया। मूर्तियों को नुकसान पहुंचाने से गांव के लोग भड़क गए। मौके पर पहुंचे अधिकारियों द्वारा नई मूर्तिया लगवाने तथा जि मेदार अराजक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने पर ही जाम खुल सका। पुलिस ने मामला दर्ज कर जाच शुरू कर दी है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा है कि चाहे लखनऊ हो या आजमगढ़ मूर्तियां सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी के इशारे पर तोड़ी गई तथा मूर्ति तोड़ने वालों पर रासुका लगाया जाना चाहिए।
गृह विभाग के अधिकारियों का कहना है प्रदेश भर में लाखों की सं या में मूर्तियां लगी है। गांव के बाहर वीरान इलाकों में भी अंबेडकर व दूसरे महापुरूषों की मूर्ति लगी है। तमाम जगहों पर विवादित जमीनों पर भी मूर्तियां लगा दी गई है।
प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह व डीजीपी एसी शर्मा ने कहा है कि प्रदेश के समाजिक सदभव को बनाये रखने के लिए मूर्तियों की हिफाजत की जाएगी। सवाल यह है कि पुलिस कितने गांवों में और कहां कहां मुस्तैद होगी। भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा मूर्तियां लगा कर प्रतीकों की राजनीति की जाती है जनता को रोटी कपड़ा मकान चाहिए लेकिन उसके बार में बात करने को कोई तैयार नही है। याद रहे मूर्तियों को लेकर होने वाली राजनीति और सदभाव बिगाड़ने की कोशिशों को रोकने के लिए मायावती सरकार को भी नई मूर्तियों की स्थापना पर रोक लगानी पड़ी थी। मायावती की सरकार ने आदेश दिया था कि मूर्ति लगाने के पहले प्रशासन ने बकायदा अनुमति ली जाए।
मूर्तिकार श्रवण प्रजापति का कहना है कि मूर्तियों को यूं ही नही लगाना चाहिए। कोई भी मूर्ति लगाने के पहले पहले उसके रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित करना चाहिए। प्रजापति ने कहा कि यह बहुत दुखद है कि उनकी कड़ी मेहनत से बनी मूर्तियां रखर ाव के कारण बदसूरत हो जाती है।






