डकैतों को दहलाने पहुंच गए हैं जवान, खेती में मदद कर खोज रहे सुराग

चित्रकूट। घनश्याम केवट, ठोकिया, ददुआ, ये वे नाम हैं, जिनके समानांतर सत्ता चलती थी। इन पर पांच-पांच लाख का इनाम घोषित था। इन्हें यूपी पुलिस ने मार कर अपने नाम पर खुब ताली बजवाई। लेकिन अभी भी मिनी चंबल के नाम से मशहूर चित्रकूट का पाठा जंगल आतंक का पर्याय बना हुआ है। नये उपजे डकैत बलखड़िया और राम सिंह पटेल गैंग पर अब पुलिस की टेढ़ी नजर है। एसटीएफ इनके पीछे पड़ चुकी है। आलम यह है कि अब एसटीएफ के जवान गरीब और शारीरिक रूप से कमजोर किसानों की खेती-बारी में मदद करके इनका विश्वास हासिल कर रहे हैं, ताकि इन डकैतों तक पहुंचा जा सके।
इस समय पाठा के जंगल में डेढ़-डेढ़ लाख रुपये के इनामी डकैत बलखड़िया और राम सिंह पटेल की हनक कायम है। इन दोनों गैंगों में तीन दर्जन सदस्य बताए जा रहे हैं। एसटीएफ की इलाहाबाद इकाई इस समय इन डकैतों की टोह में पाठा के जंगल की खाक छान रही है।
एसटीए के जवान ग्रामीणों से घाल-मेल बनाने के लिए शारीरिक रूप से कमजोर किसानों के खेत में पहुंच कर उनके खेती-किसानी के काम में बराबर हाथ बंटा रहे हैं। एक जवान का कहना है कि ऐसी मदद कर वह ग्रामीणों का विश्वास हासिल कर रहे हैं, ताकि डकैतों के ठौर-ठिकाने का सही पता चल सके और जंगल की पगडंडियों से वाकिफ हो सकें।
इलाहाबाद यूनिट के एसटीएफ प्रभारी नवेंदु सिंह ने बताया कि दस्यु बलखड़िया और राम सिंह ने कई वारदातें की हैं। दोनों के गैंग काफी बड़े हैं और दोनों पर मध्य प्रदेश सरकार व यूपी सरकार से डेढ़-डेढ़ लाख रुपये का इनाम घोषित है। उन्होंने बताया कि डकैतों को जंगल की भौगोलिक स्थिति के बारे में पूरी जानकारी है। अब तक आधा दर्जन शरणदाताओं के नाम सामने आ चुके हैं, जिनकी छानबीन की जा रही है। एसटीएफ प्रभारी के मुताबिक, एक सिरे से एसटीएफ तो दूसरे सिरे से मध्य प्रदेश पुलिस लगी हुई है। टीम की रणनीति सफल हुई तो दोनों डकैतों की कभी भी गिरफ्तारी या सफाया हो सकता है।






